Class 9 Hindi Ganga Chapter 3 संवादहीन प्रश्न उत्तर

 

Chapter 3 संवादहीन प्रश्न उत्तर

CBSE Class 9 Hindi Chapter 3 Samvaadheen (संवादहीन) Question Answers from Ganga Book

प्रस्तावना (Introduction)

नमस्कार!

आज हम कक्षा 9 हिंदी (गंगा) के पाठ 3 "संवादहीन" के प्रश्न-उत्तर का अध्ययन करेंगे। यह कहानी ताई और उनके प्रिय तोते मिट्ठू के भावनात्मक संबंध पर आधारित है। कहानी आधुनिक समाज में बढ़ते अकेलेपन, संवाद की आवश्यकता तथा स्वतंत्रता के महत्व को अत्यंत संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है।

परीक्षा की दृष्टि से यह पाठ अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस पोस्ट में दिए गए प्रश्न-उत्तर आपकी विद्यालय परीक्षा, यूनिट टेस्ट एवं वार्षिक परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे।

संवादहीन –  प्रश्न-उत्तर

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क 

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

1. कहानी में ताई और मिट्टू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?

(क) परोपकार और त्याग

(ख) ममता और स्नेह

(ग) करुणा और क्रोध

(घ) जिज्ञासा और सहायता

उत्तरः (ख) ममता और स्नेह

तर्कः ताई मिट्टू को एक पक्षी के बजाय परिवार के सदस्य की तरह मानती थीं। वे उसे अपने हाथों से नहलातीं और उसके लिए विशेष रूप से भोजन तैयार करती थीं। यह अटूट ममता का प्रतीक है।

2. जगन मास्टर द्वारा मिट्टू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?

(क) अनुशासन और परंपरा

(ख) उदासीनता और असावधानी

(ग) आत्मगौरव और विद्रोह

(घ) करुणा और नैतिकता

उत्तरः (घ) करुणा और नैतिकता

तर्कः जगन मास्टर एक शिक्षक थे और वैचारिक रूप से किसी भी जीव की गुलामी के खिलाफ थे। उनके लिए पक्षी को आजाद करना नैतिक रूप से सही कार्य था, जो उनकी करुणा को दर्शाता है।

3. मिट्टू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?

(क) भोजन की खोज

(ख) प्रेम की आकांक्षा

(ग) स्वतंत्रता की चाह

(घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति

उत्तरः (ग) स्वतंत्रता की चाह

तर्कः तोते को ताई से प्रेम था, लेकिन जैसे ही उसे मौका मिला वह उड़ गया। यह दर्शाता है कि किसी भी जीव के लिए 'स्वतंत्रता' सबसे बुनियादी और सबसे बड़ी चाहत होती है।

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Chapter 3 संवादहीन प्रश्न उत्तर 


4. ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?

(क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना

(ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव

(ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता

(घ) मिट्टू के प्रति प्रेम और संवाद

उत्तरः (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव

तर्कः ताई अकेलेपन की शिकार थीं क्योंकि उनके बच्चे साथ नहीं रहते थे। घर में बात करने वाला कोई न होना ही उनके जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी (संवादहीनता) थी।

5. कहानी में मानव समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?

(क) मजबूरी

(ख) कर्मपरायणता

(ग) अकेलापन

(घ) संवादधर्मता

उत्तरः (ग) अकेलापन

तर्कः लेखक शेखर जोशी ने इस कहानी के माध्यम से आधुनिक समाज में बुजुर्गों की उपेक्षा और उनके अकेलेपन की समस्या को बहुत ही मार्मिक ढंग से चित्रित किया है।

 

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-

1. "भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?" ताई इस वाक्य में किस 'नैया' की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?

उत्तरः यहाँ 'नैया' का अर्थ ताई के जीवन रूपी नैया से है। ताई का भरा-पूरा परिवार बिखर गया था, बच्चे शहर चले गए थे और वे उस बड़े घर में बिलकुल अकेली रह गई थीं। अपने अकेलेपन और बुढ़ापे के कष्टों को देखकर वे चिंतित होकर ईश्वर से पूछती हैं कि अब आगे का जीवन कैसे कटेगा और उनका अंत समय कैसे पार लगेगा।

2. "धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।" इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?

उत्तरः इस वाक्य में ताई के संपन्न परिवार और कारोबार के बिखरने की ओर संकेत किया गया है। उनके बहू-बेटे शहर जाकर बस गए, बेटियों की शादी हो गई। घर की देख-रेख करने वाला कोई नहीं बचा, जिसके कारण धीरे-धीरे उनकी खेती-बाड़ी और घर की सुख-सुविधाएँ दूसरों (परायों) के नियंत्रण में चली गई।

3. "ताई की सारी ममता मिट्टू पर बरस पड़ी।" क्यों?

उत्तरः ताई के पास अब अपना कहने वाला कोई नहीं था। जब गनपत उनके लिए एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता (मिट्टू) लेकर आया, तो ताई को अपने अकेलेपन में एक साथी मिल गया। अपनी संचित ममता, जो कभी अपने बच्चों और पोते-पोतियों के लिए थी, अब वे उस तोते पर लुटाने लगीं क्योंकि वही अब उनके सुख-दुख का एकमात्र सहारा था।

4. "अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।" इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?

उत्तरः इस वाक्य से पता चलता है कि मिट्टू के आने से ताई के व्यक्तित्व में सजीवता और उत्साह लौट आया था। जो ताई पहले अपने लिए खाना बनाने में भी आलस्य करती थीं, अब वे मिट्टू की पसंद का ख्याल रखने के लिए सतर्क और सक्रिय रहने लगीं। उनमें जीने की नई इच्छा जागी और वे अपने परिवेश के प्रति अधिक जागरूक हो गई।

5. "जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।" जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तरः जगन मास्टर आदर्शवादी, दयालु और स्वतंत्र विचारों के व्यक्ति थे। उन्हें किसी जीव को बंधन में देखना पसंद नहीं था।

उदाहरणः जब उन्होंने मिट्टू को पिंजरे में बंद देखा, तो उन्हें बेचैनी होने लगी। वे मिट्टू को कैद से आज़ाद करने के लिए अपने घर का दरवाज़ा बंद करके उसे पिंजरे से बाहर निकालते थे ताकि वह कम से कम कमरे के अंदर आज़ादी महसूस कर सके। वे जीवों की स्वतंत्रता का सम्मान करते थे।

6. कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है- ताई, जगन मास्टर, मिट्टू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तरः कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' सबसे अधिक नए तोते के लिए सार्थक प्रतीत होता है। पुराना मिट्टू ताई के साथ बातें करता था, उनके सवालों के जवाब देता था और उनके दुख-सुख का साथी था। लेकिन ताई के लौटने पर जो 'एवजी' (नया) तोता लाया गया, वह ताई से कोई संवाद नहीं कर पाया। ताई के बुलाने पर भी उसका चुप रहना ही उस 'संवादहीनता' को दर्शाता है जिसने ताई के एकाकीपन को और गहरा कर दिया।

7. "अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।" ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?

उत्तरः ताई के घर को 'सूना खंडहर' इसलिए कहा गया क्योंकि जिस घर में कभी रौनक, नौकर-चाकर और बच्चों का शोर रहता था, वह अब एकदम खाली और खामोश हो गया था। घर की भौतिक स्थिति भी खराब हो रही थी और अपनों के अभाव में वह विशाल भवन केवल एक निर्जीव ढाँचा मात्र रह गया था, जहाँ केवल ताई और मिट्टू ही बचे थे।

मेरे प्रश्न

नीचे कुछ उत्तर और उनके दो-दो प्रश्न दिए गए हैं। पहचानिए कि इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?

1. उत्तर: ताई के अकेलेपन को मिट्टू ने सहारा दिया।

प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?

प्रश्न ख : ताई को मिट्टू किसने भेंट में दिया था?

प्रश्न (क): ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?

2. उत्तर : ताई के लौटने से पहले मिट्टू उड़ गया था।

प्रश्न क : ताई के लौटने के बाद मिट्टू कहाँ चला गया था?

प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?

प्रश्न (ख): ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?

3. उत्तर : गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।

प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?

प्रश्न ख : गाँववाले मिट्टू के उड़ने से खुश क्यों थे?

प्रश्न (क): गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?

4. उत्तर : कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' जीवन के मौन का प्रतीक है।

प्रश्न क : कहानी का शीर्षक 'संवादहीन' क्यों उपयुक्त नहीं है?

प्रश्न ख : शीर्षक 'संवादहीन' का क्या भावार्थ है?

प्रश्न (ख): शीर्षक 'संवादहीन' का क्या भावार्थ है?

मेरे अनुभव मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभवों के आधार पर दीजिए-

1. "कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं..." ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?

उत्तरः जब मैं अपने घर या प्रियजनों से दूर होता हूँ, तो मन में एक अनजाना डर और बेचैनी बनी रहती है। बार-बार यह विचार आता है कि कहीं कोई दुर्घटना न हो जाए या घर की कोई चीज़ असुरक्षित न रह गई हो। ताई की तरह, हम भी उन चीज़ों या व्यक्तियों के प्रति सुरक्षात्मक हो जाते हैं जिनसे हम भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं। यह चिंता हमें बार-बार फोन करने या सुरक्षा जाँच करने पर मजबूर कर देती है, क्योंकि हमारा मन वहीं अटका रहता है।

2. "आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।" क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।

उत्तर: हाँ, मैं पूरी तरह मानता हूँ कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ और भावनाएँ होती हैं।

अनुभवः एक बार मेरे घर के पास एक कुत्ता घायल हो गया था। जब मैं उसे रोज़ खाना देने लगा, तो वह मुझे देखते ही पूँछ हिलाने लगा। एक दिन जब मैं उदास बैठा था, तो वह चुपचाप आकर मेरे पास बैठ गया और अपना सिर मेरे पैर पर रख दिया। उस क्षण मुझे महसूस हुआ कि वह बिना बोले भी मेरा दुख समझ रहा था। पशु प्रेम, वफादारी और दुख को गहराई से महसूस करते हैं।

3. "गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्टू की ही सूरत शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके..." ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।

उत्तरः मेरे विचार से ताई को भ्रम में रखना अनुचित था।

तर्कः यद्यपि गनपत और गाँव वालों की मंशा ताई को सदमे से बचाना था, लेकिन प्रेम केवल सूरत-शक्ल से नहीं, बल्कि आत्मा और स्वभाव के जुड़ाव से होता है। ताई का मिट्टू उनके साथ बातें करता था और उनके सुख-दुख साझा करता था। नया तोता केवल एक 'वस्तु' की तरह था जो बोल नहीं सकता था। झूठ चाहे कितना भी मीठा हो, वह सत्य की जगह नहीं ले सकता। अंत में ताई को जो मानसिक पीड़ा हुई, वह सच जानने से होने वाले दुख से कहीं अधिक गहरी थी।

4. "ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्टू 'राम राम सीताराम' की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।" क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।

उत्तर: हाँ, जीवन में कई बार ऐसी स्थितियाँ आती हैं।

अनुभवः एक बार मैंने अपने मित्र के जन्मदिन पर उसे एक बहुत बड़ा सरप्राइज देने की योजना बनाई थी। मैंने सोचा था कि वह बहुत खुश होगा और हम खूब मज़ा करेंगे। लेकिन जब मैं उसके घर पहुँचा, तो पता चला कि उसके परिवार में किसी की तबीयत खराब थी और वह बहुत तनाव में था। मेरी सारी खुशी और उम्मीदें धरी की धरी रह गई। तब मुझे समझ आया कि परिस्थितियाँ हमेशा वैसी नहीं होतीं जैसी हम कल्पना करते हैं।

5. "मिट्टू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।" क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।

उत्तरः हाँ, लंबे समय तक गुलामी या सीमित दायरे में रहने के कारण प्राणी अपनी 'स्वतंत्रता की इच्छा' खो देते हैं। इसे 'मानसिक गुलामी' कहा जा सकता है।

उदाहरणः हमने अक्सर देखा है कि सर्कस के हाथियों को बचपन से पतली ज़ंजीर से बाँधा जाता है। बड़ा होने पर उनके पास इतनी ताकत होती है कि वे ज़ंजीर तोड़ सकें, लेकिन वे कोशिश भी नहीं करते क्योंकि वे मानसिक रूप से मान चुके होते हैं कि वे बँधे हुए हैं। इसी तरह, पिंजरे में पला पक्षी खुले आसमान से डरने लगता है क्योंकि उसे पिंजरे की सुरक्षा और बिना मेहनत के मिलने वाले दाने की आदत हो जाती है।

विद्या से संवाद

ALSO CHECK-

पाठ 1 दो बैलों की कथा सारांश

पाठ 6 रीढ़ की हड्डी सारांश

कहानी का सौंदर्य

संवादहीन कहानी में अनेक विशेष बिंदु हैं जो इसे प्रभावपूर्ण बनाते हैं। नीचे कहानी के कुछ विशेष बिंदु और उनके उदाहरण दिए गए हैं। आप भी कहानी से इसी प्रकार के एक-एक उदाहरण खोजकर लिखिए –


कहानी का अंत

किसी कहानी का अंत अनेक प्रकार से हो सकता है जैसे-

1. सुखांत - जब कहानी का अंत प्रसन्नता, सफलता से होता है।

2. दुखांत - जब कथा का अंत दुख, वियोग, मृत्यु या हानि से होता है।

3. मुक्त अंत जब कहानी स्पष्ट रूप से खत्म नहीं होती, बल्कि सोचने के लिए छोड़ दी जाती है।

4. अप्रत्याशित अंत जब अंत अचानक और अप्रत्याशित रूप से सामने आता है।

5. यथार्थवादी अंत जब कहानी का अंत जीवन की सच्चाई जैसा लगे।

6. प्रेरणात्मक अंत जब कहानी के अंत में कोई प्रेरणा या सकारात्मक सोच दी जाए।

7. व्यंग्यात्मक अंत जब कहानी का अंत व्यंग्य या कटाक्ष से किसी सत्य को प्रकट करता है।

आपके अनुसार 'संवादहीन' कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?

उत्तरः 'संवादहीन' कहानी का अंत मुख्यतः दुखांत और यथार्थवादी अंत की श्रेणी में रखा जा सकता है।

कारण: कहानी के अंत में मिट्टू का उड़ जाना ताई के जीवन में गहरा वियोग और अकेलापन लेकर आता है, जो दुखांत को दर्शाता है। साथ ही, यह अंत पूरी तरह से जीवन की सच्चाई को भी प्रस्तुत करता है कि हर संबंध हमेशा साथ नहीं रहता और अकेलापन मानव जीवन की एक कड़वी सच्चाई है- इसलिए यह यथार्थवादी भी है।

नया अंत (मेरी कल्पना): मैं इस कहानी का अंत प्रेरणात्मक बनाना चाहूँगा/चाहूँगी।

-ताई मिट्टू के उड़ जाने के बाद बहुत दुखी होती है, लेकिन धीरे-धीरे वह अपने जीवन को नया अर्थ देती है। वह गाँव के बच्चों और अन्य पक्षियों की देखभाल करने लगती है। इससे उसका अकेलापन कम हो जाता है और वह समझ जाती है कि प्रेम बाँटने से जीवन फिर से खुशियों से भर सकता है।

विषयों से संवाद

1. "अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी।"

कहानी में रेखांकित पात्र का नाम नहीं दिया गया है। इसे कहीं 'मास्टरराइन', तो कहीं 'जगन मास्टर की घरवाली' कहा गया है। आपके अनुसार कहानी में ऐसा क्यों किया गया होगा?

उत्तर: कहानी में पात्र का नाम न देकर उसे उसके पद (मास्टरराइन) या संबंध (जगन मास्टर की घरवाली) से संबोधित करना ग्रामीण परिवेश की सामाजिक वास्तविकता को दर्शाता है। इसके पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

ग्रामीण संस्कृतिः गाँवों में अक्सर महिलाओं को उनके पति के नाम या उनके पेशे से पहचाना जाता है। यह उस समाज की रीति है।

पात्र की गौण भूमिकाः लेखक शायद यह दिखाना चाहते थे कि वह पात्र अपने स्वतंत्र अस्तित्व के बजाय अपने पारिवारिक संबंधों और सामाजिक पहचान से अधिक जुड़ी हुई है।

सम्मान सूचकः 'मास्टरराइन' शब्द एक आदरसूचक संबोधन है जो शिक्षक की पत्नी के लिए उपयोग किया जाता है।

2. "गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे"

(क) 'कुंभ-स्नान' एक सुप्रसिद्ध आयोजन है जिसमें करोड़ों लोग भाग लेते हैं। पता लगाइए -

इसका आयोजन क्यों किया जाता है?

उत्तरः पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत कलश निकला, तो उसकी कुछ बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों (प्रयागराज, हरिद्वार, उज्ज्वल और नासिक) पर गिरी थीं। इन स्थानों की नदियों में स्नान करने से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसी श्रद्धा के साथ कुंभ का आयोजन किया जाता है।

पिछली बार इसका आयोजन कब और कहाँ हुआ था?

उत्तरः पिछली बार पूर्ण कुंभ का आयोजन 2019 में प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। (नासिक और उज्जैन में भी बीच के वर्षों में कुंभ के आयोजन हुए हैं)।

अगला आयोजन कब और कहाँ होगा?

उत्तरः अगला महाकुंभ वर्ष 2025 में प्रयागराज में आयोजित होने वाला है।

(ख) मान लीजिए कि ताई आपके मोहल्ले में रहती हैं। वे कुंभ-स्नान के लिए कैसे गई होंगी? उनकी यात्रा का वर्णन लिखिए।

(संकेत - कहाँ से कहाँ तक की यात्रा, टिकट, यात्रा के साधन, संगी-साथी, खान-पान, ठहरना आदि।)

उत्तरः यदि ताई मेरे मोहल्ले से कुंभ-स्नान के लिए जातीं, तो उनकी यात्रा कुछ इस प्रकार होतीः

यात्रा का साधनः ताई गाँव के अन्य बुजुर्गों के साथ 'तीर्थयात्री स्पेशल' ट्रेन या बस द्वारा प्रयागराज के लिए रवाना हुई।

टिकट और साथी: उन्होंने पहले ही रेलवे स्टेशन से अपना टिकट आरक्षित करवा लिया था। उनके साथ मोहल्ले की तीन-चार सहेलियाँ और जगन मास्टर जैसे कुछ परिचित भी थे।

खान-पानः ताई ने रास्ते के लिए घर से ही 'सत्तू', 'पुआ-पकवान' और 'अचार' बाँध लिया था। रास्ते में वे गंगा मैया के भजन गाते हुए समय बितातीं।

ठहरनाः प्रयागराज पहुँचकर वे संगम तट पर बने किसी 'अखाड़े' या अस्थायी टेंट (तंबू) में ठहरी होंगी, जहाँ चारों ओर संतों का प्रवचन और शंखों की ध्वनि गूँज रही थी।

(ग) आपके गाँव या नगर में कौन-सा मेला, उत्सव या पर्व मनाया जाता है? वहाँ का दृश्य, भीड़, श्रद्धा और वातावरण का वर्णन कीजिए। मेले में कैसी आवाजें, रंग, गंध, खान-पान, दृश्य और भाव होंगे?

(संकेत - उनका वर्णन पाँच ज्ञानेंद्रियों- देखने, सुनने, सूँघने, छूने और स्वाद महसूस करने के आधार पर कीजिए।)

उत्तरः मेरे नगर में प्रतिवर्ष 'दशहरा मेला' बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

देखना (दृश्य): चारों ओर रंग-बिरंगी लाइटें, बड़े-बड़े झूले और रावण का विशाल पुतला दिखाई देता है। लोग रंगीन कपड़े पहनकर उत्साह से घूमते हैं।

सुनना (आवाज़ें): लाउडस्पीकर पर बजते लोकगीत, बच्चों की सीटियों की आवाज़ और दुकानदारों का सामान बेचने के लिए जोर-जोर से चिल्लाना सुनाई देता है।

सूँघने (गंध): वातावरण में ताज़ा जलेबियों की मिठास और चाट-मसाले की तीखी खुशबू तैरती रहती है। साथ ही हवन की सामग्री और अगरबत्तियों की गंध श्रद्धा जगाती है।

छूना (स्पर्श): भीड़ में लोगों का एक-दूसरे से टकराना, ठंडी हवा के झोंके और लकड़ी के खिलौनों की खुरदरी बनावट महसूस होती है।

स्वाद (चखना): मेले की गर्म-गर्म कुरकुरी जलेबियाँ, तीखे गोलगप्पे और मलाईदार कुल्फी का स्वाद जुबान पर चढ़ जाता है।

सृजन

1. "बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए"

अपना घर छोड़कर नए स्थान पर बस जाना आसान नहीं होता है। ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा? गाँव छोड़ते समय क्या-क्या सोचा होगा? अपना घर छोड़ने के लिए स्वयं को कैसे तैयार किया होगा?

उत्तरः ताई के बहू-बेटों द्वारा गाँव छोड़ने के पीछे कई व्यावहारिक और व्यक्तिगत कारण रहे होंगे:

कारणः गाँव में खेती-बाड़ी और पुराने कारोबार अब शायद उतने लाभदायक नहीं रह गए थे। शहरों में आधुनिक सुख-सुविधाएँ, बच्चों के लिए बेहतर अंग्रेजी माध्यम के स्कूल और रोजगार के नए अवसर उन्हें आकर्षित कर रहे होंगे।

सोच-विचारः गाँव छोड़ते समय उनके मन में एक तरफ भविष्य को लेकर उत्साह होगा, तो दूसरी तरफ ताई को अकेला छोड़ने का अपराधबोध (Guilt) भी रहा होगा। उन्होंने सोचा होगा कि शहर में सेटल होने के बाद वे ताई को भी वहीं बुला लेंगे।

तैयारीः उन्होंने भारी मन से अपनी जड़ों से कटने का निर्णय लिया होगा। स्वयं को मानसिक रूप से मजबूत करने के लिए उन्होंने अपनी जरूरतों और बच्चों के सुनहरे भविष्य को ढाल बनाया होगा। धीरे-धीरे घर का सामान समेटना और यादों को पीछे छोड़ना उनके लिए एक कठिन भावनात्मक प्रक्रिया रही होगी।

2. "वहाँ बैठे एवजी मिट्टू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की"

ताई सोच रही थीं कि मिट्टू 'राम राम सीताराम' कहेगा, लेकिन एवजी मिट्टू चुप था। कल्पना कीजिए कि एक दिन असली मिट्टू वापस आ गया। मिट्टू ने नए तोते को देखकर क्या कहा होगा? आगे की कहानी लिखिए।

(संकेत - प्रारंभ कीजिए- "एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके... ")

उत्तरः एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके... सूरज की रोशनी में उनकी चमक देख ताई की धुंधली आँखों में एक उम्मीद जगी। वह हरा बिंदु धीरे-धीरे बड़ा हुआ और सीधा ताई की ओसरी (बरामदे) की ओर आ गया। वह असली मिट्टू था !

पिंजरे के ऊपर बैठते ही उसकी नज़र अंदर बैठे उस मौन 'एवजी' तोते पर पड़ी। असली मिट्टू ने अपनी गर्दन तिरछी की, पंख फड़फड़ाए और बड़े रौब से बोला, "अरे भाई! तू यहाँ बुत बनकर क्यों बैठा है? बोल - सीताराम ! सीताराम !"

नया तोता, जो अब तक खामोश था, अपने संगी को देखकर चहचहा उठा। असली मिट्टू फिर ताई की ओर मुड़ा और बोला, "ताई! गंगा नहा आई? प्रसाद कहाँ है?" ताई की आँखों से खुशी के आँसू बह निकले। उन्होंने कांपते हाथों से पिंजरे का दरवाज़ा खोल दिया। अब घर में 'संवादहीनता' नहीं थी; असली मिट्टू अपनी राम-कहानी सुना रहा था और नया तोता उसे दोहराना सीख रहा था। बड़े घर का वह खंडहर फिर से चहचहा उठा।

3. "अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।"

आज घर जाकर अपने किसी बड़े या बुजुर्ग से बात कीजिए। उनसे पूछिए - "आप जब मेरी आयु के थे, तब समय कैसे बिताया करते थे; क्या-क्या बातें या काम करते थे? आदि।" उनके कहे हुए अनुभव अपनी पुस्तिका में लिखिए।

उत्तरः आज मैंने अपनी दादी जी से उनके बचपन के बारे में पूछा। उन्होंने बतायाः

समय बितानाः उस समय आज की तरह मोबाइल या टीवी नहीं थे। वे शाम को नीम के पेड़ के नीचे सहेलियों के साथ 'गुड्डे-गुड़ियों' का ब्याह रचाती थीं या 'गिट्टे' (पत्थर) और 'छुपम-छुपाई' खेलती थीं।

कामः पढ़ाई के साथ-साथ वे घर के कामों में हाथ बँटाती थीं, जैसे- कुएँ से पानी लाना, चरखा कातना और त्योहारों पर घर की दीवारों पर 'मांडने' (चित्र) बनाना।

अनुभवः दादी ने कहा कि उस समय सुख-सुविधाएँ कम थीं, लेकिन लोगों के पास एक-दूसरे के लिए बहुत समय था। कहानियाँ सुनकर और साथ बैठकर भोजन करने का आनंद ही कुछ और था।

4. "मिट्टू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए ! वो गए!!"

मान लीजिए कि जगन मास्टर ने मिट्टू की खोज के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। अपनी कल्पना से वह विज्ञापन बनाइए।

(संकेत- आप समाचार पत्रों में प्रकाशित खोया-पाया या तलाश संबंधी विज्ञापन देख सकते हैं।)

उत्तरः

॥ तलाशः खोया हुआ तोता ॥

पहचानः गहरे हरे रंग का पहाड़ी तोता, गले में लाल कंठी।

विशेषताः बहुत साफ़ आवाज़ में 'सीताराम', 'हर-हर गंगे' और 'राम-राम' बोलता है। वह ताई के पुराने इतिहास की बातें भी दोहराता है।

कब से खोयाः [तारीख) की दोपहर से, जगन मास्टर के निवास के पास वाले बाग से उड़ गया है।

निवेदनः यह तोता एक अकेली वृद्धा (ताई) के जीवन का एकमात्र सहारा है। यदि किसी को भी इसके बारे में कोई जानकारी मिले, तो कृपया तुरंत सूचित करें।

पुरस्कारः सही जानकारी देने वाले या तोता वापस लाने वाले सज्जन को उचित नकद इनाम दिया जाएगा।

संपर्क: जगन मास्टर (शिक्षक), पुराना मोहल्ला, गाँव [गाँव का नाम]।

मोबाइल: 98XXXXXX00

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण बिंदु

✔ मुख्य पात्र – ताई, मिट्ठू, जगन मास्टर

✔ मुख्य भाव – अकेलापन, ममता, संवाद, स्वतंत्रता

✔ केंद्रीय संदेश – संवाद जीवन का आधार है

✔ शीर्षक की सार्थकता – मिट्ठू के उड़ जाने के बाद ताई का जीवन पुनः संवादहीन हो जाता है


निष्कर्ष (Conclusion)

"संवादहीन" केवल एक तोते और उसकी मालकिन की कहानी नहीं है, बल्कि यह आधुनिक समाज की वास्तविकता को उजागर करने वाली मार्मिक कथा है। कहानी हमें बताती है कि संवाद, प्रेम और अपनापन जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं। जब संवाद समाप्त हो जाता है, तब जीवन वास्तव में संवादहीन हो जाता है।

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– By Asha Ma'am | Hindi Ki Asha



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Milan Tomic

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