NCERT Solution Class 9 Hindi Ganga Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं

CBSE Class 9 Hindi Chapter 4 Aisi Bhi Baaten Hoti hain  (ऐसी भी बातें होती हैं) Question Answers from Ganga Book

कक्षा 9 हिंदी गंगा पाठ 4 प्रश्न उत्तर

नमस्कार!

इस पोस्ट में कक्षा 9 हिंदी गंगा पाठ 4 "ऐसी भी बातें होती हैं" के सभी प्रश्न-उत्तर सरल एवं आसान भाषा में दिए गए हैं। यह पाठ महान गायिका लता मंगेशकर के जीवन, संघर्ष, अनुशासन और संगीत साधना पर आधारित एक प्रेरणादायक साक्षात्कार है।

यदि आप परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं या पाठ को जल्दी से दोहराना चाहते हैं, तो यह प्रश्नोत्तर आपके लिए बहुत उपयोगी होंगे। सभी उत्तर परीक्षा की दृष्टि से तैयार किए गए हैं।

 पाठ 4 : "ऐसी भी बातें होती हैं" प्रश्न-उत्तर

अभ्यास

रचना से संवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

1. लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा?

(क) अनुशासन और नियम के साथ जीना

(ख) भय और संशय के साथ जीना

(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना

(घ) चतुराई और संयम के साथ जीना

उत्तरः (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना

तर्कः लता जी ने बताया कि उनके पिताजी ने उन्हें हर परिस्थिति में सही बात पर खड़े रहना और किसी के आगे न झुकना सिखाया, जो स्वाभिमान और सच्चाई को दर्शाता है।

 

2. पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन-मूल्य का द्योतक है?

(क) संघर्ष

(ख) निराशा

(ग) भौतिकता

(घ) कर्तव्यनिष्ठा

उत्तरः (घ) कर्तव्यनिष्ठा

तर्कः उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाई, जो उनके कर्तव्यनिष्ठ होने को दर्शाता है।

 ALSO CHECK

Chapter 1 दो  बैलों की कथा प्रश्न उत्तर 

Chapter 2 Kya Likhu (क्या लिखूँ) Question Answers 

Chapter 3 संवादहीन प्रश्न उत्तर 

Chapter 4 ऐसी भी बातें होती हैं प्रश्न उत्तर 

3. "बिल्कुल ठेट गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है..." मंगलागौर के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है?

(क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव

(ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी

(ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व

(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका

उत्तरः (घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका

तर्कः मंगलागौर में गीत, नृत्य और सामूहिक उत्सव शामिल है, जिससे पता चलता है कि संगीत भारतीय सामाजिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

4. "गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन" इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?

(क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है।

(ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है।

(ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है।

(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।

उत्तरः (घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।

तर्कः इसका अर्थ है कि शरीर नष्ट हो जाता है, लेकिन नाम और कर्म हमेशा बने रहते हैं।

 

5. कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे ?

(क) औपचारिक

(ख) कामकाजी

(ग) आत्मीय

(घ) प्रतिस्पर्धात्मक

उत्तरः (ग) आत्मीय

तर्कः लता जी ने बताया कि उनका संबंध कोरस की लड़कियों से पारिवारिक और बहुत घनिष्ठ था।

 

6. लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

(क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं।

(ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है।

(ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं।

(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।

उत्तरः (घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।

तर्कः लता जी मानती हैं कि संगीत में इतनी शक्ति होती है कि वह असाधारण प्रभाव पैदा कर सकता है।

 

7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यतः कैसी है?

(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की

(ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध

(ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति

(घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली

उत्तरः (क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की

तर्कः उनके उत्तरों से उनकी विनम्रता, मेहनत, अनुशासन और आत्मसम्मान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

 

मेरी समझ मेरे विचार

 

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए -

1. "पिताजी उस समय पूछते थे, 'समझ गए न?'... इसके बाद वे कहते थे कि 'अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।" यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे? (संकेत- यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान?)

उत्तरः यह प्रसंग दर्शाता है कि लता जी के परिवार में अनुशासन का आधार 'डर' नहीं बल्कि 'सम्मान' था। उनके पिताजी बिना डांटे या मारे, केवल एक गंभीर दृष्टि से बच्चों को उनकी गलती का अहसास करा देते थे।

अनुशासनः जब पिताजी उन्हें देखते थे, तो बच्चे समझ जाते थे कि उनसे कोई गलती हुई है। यह मौन अनुशासन शब्दों से अधिक प्रभावशाली था।

स्नेहः गलती का अहसास कराने के तुरंत बाद वे बच्चों को "जाओ, बाहर जाकर खेलो" कहकर फिर से सामान्य कर देते थे। यह दिखाता है कि वे बच्चों के मन पर बोझ नहीं डालना चाहते थे।

इस प्रकार, यहाँ अनुशासन और स्नेह के बीच एक सुंदर संतुलन है, जहाँ बच्चे पिता का आदर करते हैं और पिता बच्चों की भावनाओं का ध्यान रखते हैं।

 

2. लता मंगेशकर पर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है?

उत्तरः लता जी के व्यक्तित्व और कला पर उनके पिता का गहरा प्रभाव था, जो निम्नलिखित बातों से स्पष्ट होता है:

संगीत की गहरी नींवः संगीत की प्राथमिक शिक्षा पिता से मिली, जिससे उनके गायन में शास्त्रीय शुद्धता और सुरों का पक्कापन आया।

स्वाभिमान और निडरताः पिता के समान ही वे स्वाभिमानी बनीं। उन्होंने रॉयल्टी जैसे मुद्दों पर स्टैंड लेकर साबित किया कि वे सही बात के लिए झुकने वालों में से नहीं थीं।

अथाह समर्पण और साधनाः पिता को घंटों रियाज़ करते देख उन्होंने संगीत को केवल पेशा नहीं, बल्कि एक कठिन 'साधना' माना, जिसके लिए वे घंटों स्टूडियो में भूखी-प्यासी खड़ी रहती थीं।

बहुआयामी दृष्टिकोण: पिता की तरह उन्होंने भी कला के विविध रूपों को अपनाया। यही कारण था कि वे शास्त्रीय संगीत से लेकर विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं के गीतों को सहजता से गा सकीं।

मजबूत नैतिक संस्कारः पिता के निधन के बाद मात्र 13 वर्ष की आयु में पूरे परिवार का भार उठाना उनके पिता द्वारा दिए गए उत्तरदायित्व और साहस के संस्कारों का ही परिणाम था।

प्रभाव दर्शाने वाले प्रमुख कार्यः

नाम आगे बढ़ानाः लता जी हमेशा मानती थीं कि उनकी हर सफलता उनके पिता का ही आशीर्वाद है। उन्होंने 'दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल' और पुरस्कारों के जरिए अपने पिता की स्मृति को जीवित रखा।

मराठी और शास्त्रीय जुड़ावः फिल्मी दुनिया में होने के बावजूद उन्होंने अपनी जड़ों (मराठी संस्कृति और शास्त्रीय संगीत) को कभी नहीं छोड़ा, जो उनके पिता के व्यक्तित्व का मुख्य हिस्सा था।

 ALSO CHECK-

पाठ 1 दो बैलों की कथा सारांश

पाठ 6 रीढ़ की हड्डी सारांश

3. "मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।" 'नाम आगे बढ़ाने' का लता जी के लिए क्या अर्थ है? क्या यह सिर्फ प्रसिद्धि पाना है या इससे कोई महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है?

उत्तरः लता मंगेशकर के लिए 'नाम आगे बढ़ाने' का अर्थ केवल प्रसिद्धि पाना नहीं है, बल्कि इससे एक महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है।

उनके लिए इसका अर्थ है-

अपने पिता की प्रतिष्ठा और सम्मान को बनाए रखना

उनके द्वारा सिखाए गए संगीत के मूल्यों और परंपराओं को आगे बढ़ाना

अपने कार्य में ईमानदारी, मेहनत और समर्पण दिखाना

इसलिए 'नाम आगे बढ़ाना' केवल नाम कमाना नहीं, बल्कि परिवार की विरासत को सम्मानपूर्वक निभाना और उसे और ऊँचा उठाना है।

 

4. किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध कैसे थे ?

उत्तरः साक्षात्कार से पता चलता है कि लता जी के अपने सहयोगियों (विशेषकर कोरस गाने वाली लड़कियों और संगीतकारों) के साथ संबंध बहुत ही आत्मीय, सरल और सम्मानजनक थेः

सादगीः वे इतनी बड़ी कलाकार होने के बावजूद स्टूडियो में कोरस की लड़कियों के साथ जमीन पर बैठकर बातें करती थीं।

परिवार जैसा व्यवहारः कोरस की लड़कियों को वे अपने घर जैसा मानती थीं; उनकी बहन की शादी में वे सभी आमंत्रित थे।

सम्मानः वे अपने वरिष्ठ संगीतकारों (जैसे नौशाद साहब, अनिल विश्वास) का बहुत सम्मान करती थीं और दीवाली पर खुद उनके घर मिठाई लेकर जाती थीं।

समानुभूतिः उन्होंने कभी भी अपने और अपने सहयोगियों के बीच 'बड़ा-छोटा' होने का भेदभाव नहीं किया, जो एक टीम के रूप में काम करने के लिए अनिवार्य है।

साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व / उभरती छवि

साक्षात्कार से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-कौन से गुण या विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं? चुनकर लिखिए

-

 

दृढ़ता, कृतज्ञता, दार्शनिकता, समर्पण, उत्तरदायित्व, स्पष्टता, एकाग्रता, साधना, स्पष्टवादिता, विनम्रता, कठोरता, सरलता, आत्मविश्वास, उत्सवप्रियता, श्रद्धा, मानवता, अमरता, घमंड, स्वाभिमान

 

1. "मुझे अपने गाने और रिकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।"

उत्तरः एकाग्रता, समर्पण, साधना।

2. "अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।"

उत्तरः स्वाभिमान, दृढ़ता, आत्मविश्वास, स्पष्टवादिता।

3. "आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।"

उत्तरः विनम्रता, कृतज्ञता, सरलता।

4. "मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।"

उत्तरः दार्शनिकता, स्पष्टता, मानवता।

मेरे प्रश्न

नीचे दिए गए वाक्य को पढ़िए-

"संगीत में असीम शक्ति और अप्रत्याशित रचने की क्षमता होती है।"

इस वाक्य के आधार पर अनेक प्रश्न बनाए जा सकते हैं, जैसे-

1. लता मंगेशकर ने संगीत के विषय में क्या कहा?

2. लता मंगेशकर ने संगीत की क्या विशेषताएँ बताई हैं?

3. लता मंगेशकर ने संगीत की क्षमता का आकलन करते हुए क्या कहा?

4. उस्ताद अली अकबर खाँ और पंडित रविशंकर के कंसर्ट में हुई घटना से संगीत के बारे में क्या पता चलता है?

आपने देखा कि अनेक प्रश्नों का एक ही उत्तर हो सकता है और एक ही उत्तर से अनेक प्रश्न बनाए जा सकते हैं।

अब नीचे दिए गए उत्तरों से अधिक से अधिक प्रश्न बनाइए (कम से कम दो) -

1. उत्तरः 'मंगलागौर' जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था।

उत्तरः प्रश्नावली-

i. लता मंगेशकर के अनुसार 'मंगलागौर' उत्सव की क्या विशेषता थी?

ii. महाराष्ट्र के लोक पर्वों में स्त्रियों के आपसी संबंधों और उल्लास का वर्णन किस प्रकार किया गया है?

iii. 'मंगलागौर' जैसे पारंपरिक आयोजनों में संगीत और नृत्य के माध्यम से कौन-से मानवीय मूल्य प्रकट होते थे?

iv. साक्षात्कार में स्त्रियों के बीच सौहार्द और सामूहिकता के उदाहरण के रूप में किस पर्व का उल्लेख किया गया है?

2. उत्तरः लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी।

उत्तरः प्रश्नावली-

i. तकनीक और पुरानी गायिकी की तुलना करते हुए लता जी के क्या विचार थे?

ii. पुराने दौर के संगीतकारों के काम में लता जी को कौन-से गुण सबसे प्रभावशाली लगते थे?

iii. क्या लता जी मानती थीं कि तकनीकी विकास ने पुराने संगीत की गहराई की जगह ले ली है?

iv. पुराने संगीतकारों की रचनाओं की विशिष्टता के पीछे लता जी ने क्या कारण बताया है?

मेरे अनुभव मेरे विचार

अपने अनुभवों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1. "अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।" क्या आप किसी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं जब आपको किसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ा हो? कब और क्यों?

उत्तर: हाँ, मेरे जीवन में एक ऐसी स्थिति तब आई थी जब विद्यालय के एक सामूहिक प्रोजेक्ट के दौरान मेरे साथियों ने अधिक अंक पाने के लिए इंटरनेट से सामग्री सीधे नकल (copy) करने का निर्णय लिया। मुझे यह बात गलत लगी क्योंकि यह हमारी मेहनत नहीं थी। हालाँकि मेरे सभी दोस्त एक तरफ थे, फिर भी मैं अपनी बात पर अकेला खड़ा रहा। मैंने स्पष्ट रूप से कहा कि मैं स्वयं शोध करके और अपनी भाषा में लिखकर प्रोजेक्ट पूरा करूँगा। अंत में, मेरी ईमानदारी देखकर शिक्षक ने न केवल मेरे काम की सराहना की, बल्कि मेरे साथियों को भी अपनी गलती का अहसास हुआ।

2. "बाबा ने जैसा सिखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।"

आपके परिवार में भी कोई ऐसी सीख या नियम अवश्य होंगे जिनका पालन आप किसी के याद दिलाए बिना स्वतः करते होंगे, उनके विषय में बताइए।

उत्तरः मेरे परिवार में एक बहुत ही महत्वपूर्ण सीख दी गई है- 'समय की पाबंदी और दूसरों का सम्मान'। हमारे घर में यह नियम है कि चाहे कोई छोटा हो या बड़ा, हम सभी को एक-दूसरे की बात पूरी होने तक चुप रहकर सुनना चाहिए और समय पर अपने कार्य पूर्ण करने चाहिए। इस सीख का पालन में बिना किसी के याद दिलाए स्वतः करता हूँ। उदाहरण के लिए, सुबह समय पर उठना और अपनी पढ़ाई की मेज खुद व्यवस्थित करना अब मेरी आदत बन चुकी है, जिसके लिए मुझे किसी के टोकने की प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती।

3. "पहले दिन गुड़ि बाँधने के बाद नौ दिन तक उत्सव मनाया जाता है।"

आप भी अपने घर में किसी पारंपरिक पर्व को विशेष तरीके से मनाते होंगे। उसका वर्णन कीजिए।

उत्तरः हमारे घर में 'दीपावली' का पर्व बहुत विशेष तरीके से मनाया जाता है। केवल बाजार की रोशनी के बजाय, हम घर पर मिट्टी के दीये खुद रंगते हैं और उनमें तेल व रुई की बत्ती लगाकर घर के कोने-कोने में सजाते हैं। मेरी माँ घर के मुख्य द्वार पर चावल के आटे और रंगों से पारंपरिक रंगोली बनाती हैं। हम इस दिन पटाखों के बजाय घर में बने पकवानों का आनंद लेते हैं और अपने पड़ोसियों व उन लोगों के साथ खुशियाँ बाँटते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। यह आत्मीयता का भाव इस पर्व को हमारे लिए खास बना देता है।

4. "बिल्कुल ठेट गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है, मगर आहिस्ता आहिस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है।"

पाठ में आपने पढ़ा कि लता मंगेशकर के बचपन से अब तक उत्सवों से जुड़ी अनेक परंपराएँ बदल रही हैं। कौन-कौन सी परंपराएँ बदल गई हैं? अपने घर-परिवार में बातचीत करके पता लगाइए कि विभिन्न त्योहारों को मनाने के तरीकों में कौन-कौन से बदलाव आ रहे हैं?

उत्तरः अपने घर-परिवार में बातचीत करने पर पता चला कि त्योहारों को मनाने के तरीकों में निम्नलिखित प्रमुख बदलाव आए हैं:

सामूहिकता की कमीः पहले होली या दीवाली जैसे त्योहार पूरा मोहल्ला मिलकर मनाता था, लेकिन अब यह केवल परिवार के भीतर सिमट कर रह गया है।

डिजिटल प्रभावः पहले लोग एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएँ देते थे, लेकिन अब इसकी जगह 'व्हाट्सएप' और 'सोशल मीडिया' के संदेशों ने ले ली है।

दिखावा और बाजारवादः उत्सवों में अब पारंपरिक गीतों और घर के बने पकवानों की जगह डीजे (DJ) और बाजार की मिलावटी मिठाइयों ने ले ली है।

पारंपरिक गीतों का लोपः जैसे लता जी ने 'मंगलागौर' के बारे में बताया, वैसे ही अब विवाह या अन्य शुभअवसरों पर गाए जाने वाले लोकगीत (जैसे- सोहर, बधाई) कम सुनाई देते हैं।

 

विद्या से संवाद

 

साक्षात्कार की पड़ताल

1. 'ऐसी भी बातें होती हैं' एक साक्षात्कार है। साक्षात्कार में एक व्यक्ति प्रश्न पूछता है और दूसरा व्यक्ति उन प्रश्नों के उत्तर देता है। साक्षात्कार विधा के कुछ मुख्य बिंदु आगे दिए गए हैं। इस साक्षात्कार में से इन मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करने वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।

साक्षात्कार के मुख्य बिंदु

साक्षात्कार लेने वाले का नाम और जिसका साक्षात्कार लिया गया, उसका नाम उत्तरः इसमें साक्षात्कारकर्ता और लता मंगेशकर का उल्लेख मिलता है।

प्रश्नोत्तर

उत्तरः "आपको संगीत की प्रेरणा कहाँ से मिली?" "मुझे बचपन से ही संगीत का वातावरण मिला था।"

भावनात्मक वातावरण

उत्तरः "मुझे अपने गाने और रिकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।"

आमंत्रण, स्वागत और परिचय

उत्तरः साक्षात्कार की शुरुआत में उनका परिचय दिया गया है और आदरपूर्वक बातचीत की गई है।

उत्तर देने की शैली का संकेत

 

उत्तरः उनके उत्तर सरल, स्पष्ट और अनुभव पर आधारित हैं।

जैसे - "अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो।"

विचार और उदाहरण

उत्तरः "अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।"

संस्मरण

उत्तरः "पहले के दौर में पुरुष और स्त्री आवाजों के कोरस हम लोगों के गीतों के साथ ही रिकॉर्ड होते थे।"

समापन

उत्तरः अंत में उनके विचारों और अनुभवों के साथ साक्षात्कार समाप्त होता है, जिसमें उनके जीवन और संगीत के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट होता है।

2.

"मैं कोशिश करूँगी कि जो कुछ भी मैंने संगीत में रहते हुए जाना है, उसे आपको बता सकूँ।"

इस कथन से साक्षात्कार की शैली के विषय में क्या पता चलता है- क्या यह औपचारिक संवाद है या आत्मीय बातचीत ? अपने विचार तर्क सहित लिखिए।

उत्तरः यह कथन साक्षात्कार की आत्मीय बातचीत को दर्शाता है, न कि औपचारिक संवाद को।

तर्कः

"मैं कोशिश करूँगी..." जैसे शब्द विनम्रता और अपनापन दिखाते हैं।

इसमें साक्षात्कार देने वाली श्रोता से सीधे जुड़ने का प्रयास कर रही है।

भाषा सरल, सहज और मित्रवत है, जो औपचारिकता से अलग है।

इसलिए यह साक्षात्कार आत्मीय, सहज और संवादात्मक शैली में किया गया है।

 

आपका साक्षात्कार

"आप पूछिए, मैं आपके प्रश्नों का जवाब देने के लिए तैयार हूँ।"

प्रस्तुत पाठ में विश्व-प्रसिद्ध व्यक्तित्व का साक्षात्कार दिया गया है। कल्पना कीजिए कि आप भी लता मंगेशकर के इस साक्षात्कार में उपस्थित हैं। आप लता जी से कौन-कौन से अलग प्रश्न पूछते और क्यों?

उत्तरः प्रस्तावित प्रश्न और उनके कारण

1. रियाज़ और एकाग्रता पर प्रश्न

प्रश्नः "दीदी, आज के दौर में जहाँ हर तरफ शोर और ध्यान भटकाने वाली चीजें (Distractions) बहुत हैं, एक संगीत साधक अपनी एकाग्रता कैसे बनाए रखे? क्या आपके रियाज़ का कोई ऐसा विशेष समय या तरीका था जिसने आपकी आवाज़ को दशकों तक एक जैसा बनाए रखा?"

क्यों: मैं यह जानना चाहता कि इतनी लंबी और व्यस्त यात्रा में उन्होंने अपनी आवाज़ की गुणवत्ता और मानसिक शांति को कैसे सुरक्षित रखा, ताकि आज के विद्यार्थी उससे सीख सकें।

2. प्रकृति और संगीत के संबंध पर प्रश्न

प्रश्नः "कहा जाता है कि संगीत प्रकृति के बहुत करीब है। क्या आपको कभी पहाड़ों, बारिश या पक्षियों की चहचहाहट में कोई विशेष 'धुन्' या 'ताल' सुनाई दी, जिसे आपने अपने किसी गीत में उतारने का प्रयास किया हो?"

क्यों: लता जी की आवाज़ में एक नैसर्गिक शुद्धता थी। मैं यह समझना चाहता कि प्रकृति उनके रचनात्मक जीवन को किस प्रकार प्रेरित करती थी।

3. क्षेत्रीय भाषाओं के प्रति लगाव पर प्रश्न

प्रश्नः "आपने भारत की लगभग सभी क्षेत्रीय भाषाओं में गीत गाए हैं। किसी ऐसी भाषा का गीत रिकॉर्ड करते समय, जिसे आप पूरी तरह नहीं जानती थीं, आप उस भाषा की आत्मा और भावनाओं (Expressions) को इतनी सटीकता से कैसे पकड़ लेती थीं?"

क्यों: यह प्रश्न उनके सीखने की क्षमता और भाषाई बारीकियों के प्रति उनके सम्मान को समझने के लिए होता।

4. नई पीढ़ी और तकनीक पर प्रश्न

प्रश्नः "आजकल 'ऑटो-ट्यून' और 'एआई' (AI) जैसी तकनीकें आ गई हैं जो बेसुरे को भी सुरीला बना देती हैं। क्या आपको लगता है कि तकनीक के इस बढ़ते प्रभाव से संगीत की वह 'आत्मा' या 'साधना' कहीं खोती जा रही है?"

क्यों: मैं तकनीकी युग में शास्त्रीय साधना के महत्व पर उनके बेबाक विचार जानना चाहता।

5. संगीत के सामाजिक प्रभाव पर प्रश्न

प्रश्नः "आपके कई गीत जैसे 'ऐ मेरे वतन के लोगों' सुनकर पूरा देश रो पड़ा था। क्या आपको लगता है कि संगीत समाज की कड़वाहट मिटाने और शांति लाने का सबसे सशक्त माध्यम हो सकता है?"

क्यों: मैं संगीत की उस शक्ति पर उनकी राय जानना चाहता जो सीमाओं और विवादों से परे इंसानी दिलों को जोड़ने की क्षमता रखती है।

विषयों से संवाद

1. "एक स्टूडियो से दूसरे और तीसरे स्टूडियो के चक्कर में ही पूरा दिन बीत जाता था।"

सन् 1942 में अपने पिता की मृत्यु के बाद लता मंगेशकर ने अकेले अपनी माँ, छोटे भाई-बहनों की देखभाल की और अपने घर को सँभाला। उस समय उनकी आयु मात्र 13 वर्ष थी। तब महिलाओं का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। उस समय सुबह से रात तक एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागते हुए लता जी के एक दिन की कल्पना कीजिए। इस भागदौड़ में वे किन-किन चुनौतियों का सामना करती होंगी?

(संकेत - भोजन, यात्रा-भाड़ा, सुरक्षा, थकान आदि)

उत्तरः सन् 1942 में 13 वर्ष की आयु में लता मंगेशकर के लिए जीवन बहुत कठिन था। उनके संघर्षपूर्ण दिन की कल्पना इस प्रकार की जा सकती है-

शारीरिक थकान और मानसिक दबावः सुबह से रात तक स्टूडियो के चक्कर लगाने से बहुत थकान होती थी। काम मिलने की चिंता भी बनी रहती थी।

यात्रा की कठिनाइयाँः उस समय सुविधाएँ कम थीं, इसलिए वे अक्सर लंबी दूरी पैदल चलती थीं या भीड़भाड़ वाली ट्रेनों से सफर करती थीं।

भोजन की समस्याः कम पैसों के कारण वे साधारण खाना खाकर ही दिन बिताती थीं और पैसे बचाने की कोशिश करती थीं।

सामाजिक सोचः उस समय फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था, इसलिए उन्हें लोगों की बातों और तानों का सामना करना पड़ता था।

सुरक्षा की चिंता : छोटी उम्र में देर रात तक काम करना और अकेले आना-जाना उनके लिए असुरक्षित भी हो सकता था।

2. "पहले के दौर में पुरुष और स्त्री आवाजों के कोरस हम लोगों के गीतों के साथ ही रिकॉर्ड होते थे। भले ही वह गाना डुएट हो या फिर कोई सोलो सांग।"

अपने घर, आस-पड़ोस, समुदाय, विद्यालय में होने वाले उन कार्यों के विषय में बताइए जिनमें सहयोग और सामूहिकता की आवश्यकता होती है।

उत्तरः हमारे घर, आस-पड़ोस, समुदाय और विद्यालय में कई ऐसे कार्य होते हैं जिनमें सहयोग और सामूहिकता की आवश्यकता होती है-

घर में: घर की सफाई, खाना बनाना, त्योहारों की तैयारी और मेहमानों का स्वागत मिलकर किया जाता है।

आस-पड़ोस मेंः शादी, पूजा या किसी कार्यक्रम में सभी लोग मिलकर सहयोग करते हैं।

समुदाय मेंः स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण और सामाजिक कार्य सामूहिक प्रयास से ही सफल होते हैं।

विद्यालय मेंः समूह प्रोजेक्ट, खेलकूद प्रतियोगिताएँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रार्थना सभा में सभी का सहयोग जरूरी होता है।

इससे यह सीख मिलती है कि मिल-जुलकर काम करने से कार्य आसान, सफल और आनंददायक बन जाता है।

 

शास्त्रीय संगीत

 

1. "फिर उसमें लंबी-लंबी रागदारी वाले गायन की भी परंपरा थी।"

रागदारी वाले गायन का अर्थ है भारतीय शास्त्रीय संगीत। आपने इस पाठ में संगीत से जुड़े अनेक शब्दों को पढ़ा है। शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय और अपने शिक्षकों की सहायता से इनके अर्थ और उदाहरण खोजकर लिखिए -

 

राग, सुर, बंदिश, अभंग, सोहर, फाग, बढ़ावा

 

उत्तरः संगीत से जुड़े शब्दों के अर्थ और उदाहरण

राग : भारतीय शास्त्रीय संगीत में सुरों का एक विशेष ढाँचा, जो मन को प्रसन्न करता है।

उदाहरणः राग भैरव, राग यमन आदि शास्त्रीय संगीत में प्रसिद्ध हैं।

सुर : संगीत की मूल ध्वनि या स्वर।

उदाहरणः गायक ने मधुर सुरों में गीत गाया।

बंदिश : शास्त्रीय संगीत में राग के नियमों के अनुसार रचित गीत या रचना।

उदाहरणः उस्ताद ने राग यमन में सुंदर बंदिश प्रस्तुत की।

अभंग : महाराष्ट्र की भक्ति परंपरा का एक धार्मिक गीत, जो विठ्ठल भगवान की स्तुति में गाया जाता है।

उदाहरणः

संत तुकाराम के अभंग आज भी गाए जाते हैं।

सोहर : बच्चे के जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला मंगल गीत।

उदाहरण: गाँव में बच्चे के जन्म पर सोहर गाया गया।

फाग : होली के समय गाया जाने वाला लोकगीत।

उदाहरण: होली में लोग मिलकर फाग गाते हैं।

बढ़ावा : किसी शुभ अवसर जैसे जन्म, विवाह आदि पर गाया जाने वाला मंगल गीत या बधाई गीत।

उदाहरण: शादी में महिलाओं ने बढ़ावा गाकर खुशी मनाई।

2. "त्योहारों के संदर्भ में एक बात और ध्यान में आती है कि अधिकांश प्रदेशों में पर्वों व अनुष्ठानों से संदर्भित घर-घर गीत गाए जाने का प्रचलन रहा है।" आपने पढ़ा कि भारत में त्योहारों पर फाग, धमार, सोहर, बढ़ावा, छठ के गीत आदि गाने की परंपरा है। अपने क्षेत्र में गाए जाने वाले ऐसे गीतों के विषय में अपने घर में पता कीजिए और एक गीत अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।

उत्तरः मेरे क्षेत्र में त्योहारों और विशेष अवसरों पर पारंपरिक लोकगीत गाने की परंपरा है। जैसे- होली के अवसर पर फाग गीत, विवाह के समय बधावा गीत, और बच्चे के जन्म पर सोहर गीत गाए जाते हैं। ये गीत खुशी, उत्सव और परंपरा को दर्शाते हैं।

उदाहरण के रूप में एक लोकगीत (फाग गीत):

"आओ खेलें होली सखी री, रंग बरसे गगन से, ढोलक बाजे, मन हर्षाए,

खुशियाँ छाई आँगन में।"

इस प्रकार के गीत हमारे त्योहारों को और भी आनंदमय बनाते हैं और हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखते हैं।

साइबर सुरक्षा

"आज, जो स्थिति है और जिस तरह हमारी तकनीक विकसित हो चुकी है, उसमें अगर इन लोगों को काम करने का मौका मिलता, तब तो कमाल ही हो गया होता।"

आज तकनीकी विकास इतना अधिक हो चुका है कि अनेक धोखेबाज / ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का प्रयोग करके अपनी आवाज़ बदलकर लोगों के साथ धोखाधड़ी करते हैं। कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि साइबर सुरक्षा नियमों का प्रयोग करते हुए इस प्रकार की धोखाधड़ी से किस प्रकार बचा जा सकता है?

(https://cybercrime.gov.in/UploadMedia/CyberSafety Hindi.Pdf)

उत्तरः हम निम्न तरीकों से ऐसी धोखाधड़ी से बच सकते हैं-

किसी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें।

अपनी व्यक्तिगत जानकारी (OTP, पासवर्ड, बैंक विवरण) किसी के साथ साझा न करें।

संदिग्ध आवाज़ या संदेश मिलने पर पहले परिवार या विश्वसनीय व्यक्ति से पुष्टि करें।

केवल सुरक्षित और आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का ही उपयोग करें।

अपने मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट में मजबूत पासवर्ड और दो-स्तरीय सुरक्षा (2FA) का प्रयोग करें।

किसी भी धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन या पुलिस को सूचित करें।

इस प्रकार, जागरूकता और सावधानी अपनाकर हम AI आधारित धोखाधड़ी से सुरक्षित रह सकते हैं।

हम ऐसे भी बोलते हैं

"वे बस हमको गंभीरता से देखते थे... मगर हम सभी समझ जाते थे कि हमको बुलाया किसलिए गया है।"

1. क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा व्यक्ति है जो बिना कुछ बोले सिर्फ नजरों या संकेतों (हाव-भाव) से ही आपको समझा देता है? उस अनुभव के विषय में बताइए।

उत्तर: हाँ, मेरे जीवन में मेरी माताजी (या पिताजी/शिक्षक) ऐसी व्यक्ति हैं, जो बिना एक शब्द बोले केवल अपनी नज़रों से मुझे अपनी बात समझा देती हैं।

अनुभवः मुझे याद है जब एक बार हमारे घर कुछ मेहमान आए थे और मैं बातों-बातों में कुछ ऐसी निजी बात बताने लगा जो मुझे नहीं बतानी चाहिए थी। तभी मैंने देखा कि माँ मुझे बड़े ध्यान से और गंभीरता से देख रही थीं। उनकी उस एक स्थिर नज़र में एक चेतावनी थी- "अभी चुप हो जाओ, हम बाद में बात करेंगे।" मैं तुरंत समझ गया और मैंने अपनी बात बदल दी। यह अनुभव सिखाता है कि जो गहरा जुड़ाव शब्दों से नहीं होता, वह आँखों की भाषा से हो जाता है।

2. यदि कोई व्यक्ति बिना बोले (संकेत भाषा में) आपको कुछ समझा रहा है, तो वह आपके साथ और आप उसके साथ कैसा व्यवहार करेंगे?

(संकेत - धैर्य, जिज्ञासा, समानुभूति आदि)

उत्तरः यदि कोई व्यक्ति संकेत भाषा (Sign Language) का प्रयोग कर रहा है, तो संवाद को सफल बनाने के लिए मेरा व्यवहार निम्नलिखित जीवन-मूल्यों पर आधारित होगाः

धैर्य (Patience): मैं बिना किसी जल्दबाजी के उनकी बात पूरी होने का इंतज़ार करूँगा। संकेतों को समझने में समय लग सकता है, इसलिए मैं विचलित नहीं होऊँगा।

समानुभूति (Empathy): मैं खुद को उनकी जगह रखकर सोचने का प्रयास करूँगा ताकि मैं उनके भावों और भावनाओं को केवल दिमाग से नहीं, बल्कि दिल से भी महसूस कर सकूँ।

जिज्ञासा (Curiosity): मैं उनकी भाषा को सीखने और समझने के प्रति उत्सुक रहूँगा। यदि मुझे कोई संकेत समझ नहीं आएगा, तो मैं विनम्रता से दोबारा पूहूँगा ताकि संवाद में कोई गलतफहमी न रहे।

सजगताः मैं अपनी बॉडी लैंग्वेज (हाव-भाव) को भी सकारात्मक रखूँगा और उनसे निरंतर 'आई कॉन्टैक्ट' (नज़रों का संपर्क) बनाए रखूँगा ताकि उन्हें यह महसूस हो कि मैं उनकी बात में पूरी तरह रुचि ले रहा हूँ।

सृजन

1. "अगर हम समय के चक्र (टाइम मशीन) को घुमाकर सन् 1949-50 में ले जाएँ", कल्पना कीजिए कि आपके पास टाइम मशीन है। 1940-50 के दशक में जाकर लता जी से मिलिए और उनके साथ बिताए गए एक दिन का वर्णन डायरी के रूप में लिखिए। उस समय की वेशभूषा, भोजन, संगीत आदि का वर्णन अवश्य कीजिए।

उत्तरः डायरी लेखनः लता जी के साथ एक दिन (दशक 1940-50)

दिनांक: 12 अक्टूबर, 1949

स्थानः गोरेगाँव स्टूडियो, बॉम्बे (मुंबई)

आज का दिन मेरे जीवन के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। 'टाइम मशीन' ने मुझे 1940 के उस दौर में पहुँचा दिया, जहाँ सादगी ही सुंदरता थी। आज मुझे सुरों की साधिका लता जी के साथ पूरा दिन बिताने का मौका मिला।

वेशभूषा और सादगीः सुबह जब मैं स्टूडियो पहुँचा, तो देखा कि लता जी बहुत ही साधारण सूती सफेद साड़ी पहने हुए थीं। उनके बाल सलीके से गूँथे हुए थे और माथे पर एक छोटी सी बिंदी थी। उनकी वेशभूषा उनके व्यक्तित्व की तरह ही सौम्य थी।

संगीत की साधनाः उस समय का संगीत आज जैसा डिजिटल नहीं था। स्टूडियो में बड़े-बड़े माइक्रोफोन थे और हर वाद्ययंत्र (साज़) असली था। लता जी संगीतकार खेमचंद प्रकाश जी के साथ 'महल' फिल्म के गाने का रियाज़ कर रही थीं। उन्होंने मुझे बताया कि कैसे उन्हें एक सही 'टेक' के लिए घंटों भूखे-प्यासे खड़ा रहना पड़ता है। उनकी आवाज़ में वह खनक थी, जो सीधे रूह को छू रही थी।

भोजनः दोपहर के भोजन के समय हमने बहुत ही सादा मराठी भोजन - वरण-भात (दाल-चावल), सूखी सब्ज़ी और पूरन पोली खाई। भोजन करते समय उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों की बातें साझा कीं।

शाम को जब मैं वापस अपनी टाइम मशीन की ओर बढ़ा, तो मेरे कानों में उनकी वही सुरीली आवाज़ गूँज रही थी। वह दौर भले ही सुविधाओं में कम था, लेकिन कला और संवेदनाओं में आज से कहीं आगे था।

2. "आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।"

कल्पना कीजिए कि यह लता जी का अंतिम संदेश है- आप उस पर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया एक अनुच्छेद के रूप में व्यक्त कीजिए।

उत्तरः लता जी के अंतिम संदेश पर भावनात्मक प्रतिक्रियाः

लता जी का यह संदेश- "मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है"- उनकी महानता और अगाध विनम्रता का साक्षात प्रमाण है। यह पढ़कर मन भावुक हो उठता है कि जिस आवाज़ ने सात दशकों तक पूरे राष्ट्र की भावनाओं को स्वर दिया, वह व्यक्तित्व स्वयं को केवल जनता के प्रेम का ऋणी मानता है। उनके लिए 'अमरता' कोई अहंकार नहीं, बल्कि उनके प्रशंसकों का आशीर्वाद है।

उनकी आवाज़ महज़ एक गायन नहीं, बल्कि हर भारतीय की सुबह की प्रार्थना, लोरी और देशभक्ति का अटूट हिस्सा है। जब वे कहती हैं कि शरीर नश्वर है, तो हमें उस कड़वे सच का अहसास होता है, लेकिन साथ ही यह सुकून भी मिलता है कि 'सुर' कभी नहीं मरते। उनकी आवाज़ का जादू हवाओं में हमेशा बना रहेगा। वे भौतिक रूप से भले ही हमारे बीच न हों, परंतु अपनी सुरीली विरासत के माध्यम से वे आने वाली कई सदियों तक हर संगीत प्रेमी के दिल में धड़कती रहेंगी। वास्तव में, उनकी आवाज़ ही उनकी पहचान है और वही उनकी अमरता का आधार है।

भाषा से संवाद

व्याकरण की बात - मुहावरे

"मगर किसी के आगे जाकर हाथ नहीं पसारना है।"

उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित अंश मुहावरा है। हाथ पसारना या फैलाना का अर्थ है- कुछ माँगना या याचना करना। हाथों से जुड़े अनेक मुहावरे आपने पढ़े और सुने होंगे। ऐसे ही कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं। इनका प्रयोग करते हुए

वाक्य बनाइए-

हाथ में आना वश में आना या अधिकार में मिलना।

वाक्यः बहुत लंबी भाग-दौड़ के बाद आखिरकार शातिर चोर पुलिस के हाथ में आ ही गया।

हाथ का मैल होना अत्यंत तुच्छ वस्तु होना (अक्सर धन के संदर्भ में)।

वाक्यः धनी लोगों के लिए लाखों रुपये खर्च करना तो हाथ का मैल होता है।

हाथ से हाथ मिलाना मिलकर काम करना या सहयोग करना।

वाक्यः यदि हम सब हाथ से हाथ मिलाकर चलें, तो देश से गरीबी और गंदगी को जड़ से मिटाया जा सकता है।

हाथ साफ करना चोरी करना या चालाकी से कुछ हथिया लेना।

वाक्यः मेले की भीड़ का फायदा उठाकर उचक्के ने यात्री के मोबाइल पर अपना हाथ साफ़ कर दिया।

हाथ से निकल जाना अवसर या मौका खो देना।

वाक्यः साक्षात्कार के लिए समय पर न पहुँचने के कारण बैंक की नौकरी सुमित के हाथ से निकल गई।

हाथ धो बैठना - किसी प्रिय वस्तु या व्यक्ति को हमेशा के लिए खो देना।

वाक्यः अपनी लापरवाही और तेज़ रफ़्तार के कारण वह अपनी नई कार से हाथ धो बैठा।

हमारी भाषाएँ

1. "'गाव गेला वाहून, नाव गेला राहून'। मतलब गाँव तो बह जाता है, लेकिन जो नाम है, वह रह जाता है।" आपने एक कहावत और उसका हिंदी में अर्थ पढ़ा। इस कहावत के अर्थ को अपने घर या क्षेत्र की भाषा अथवा भाषाओं में लिखिए।

उत्तरः मराठी कहावत 'गाव गेला वाहून, नाव गेला राहून' का अर्थ है कि भौतिक वस्तुएँ या स्थान नष्ट हो सकते हैं, परंतु व्यक्ति के कर्म और उसका नाम सदैव जीवित रहता है।

ब्रजभाषा (उदाहरण): "गाँव भलें ही बह जाय, पै नाम सदा रह जाय।"

पंजाबी (उदाहरण): "पिंड भवें रुढ़ जावे, पर नां रह जांदा है।"

भोजपुरी (उदाहरण): "गाँव भले बह जाई, बाकिर नाम रह जाई।"

मराठी (उदाहरण): "गाव वाहून जातं, पण नाव राहून जातं।"

गुजराती (उदाहरण): "गाम पडी भय, पण नाम रही भया"

2. लता जी ने मराठी कहावत को हिंदी में समझाया। अब आप अपनी मातृभाषा की कोई कहावत चुनिए और उसका हिंदी में अनुवाद कीजिए। अनुवाद के बाद भाव में क्या परिवर्तन आया? लिखिए।

उत्तरः मातृभाषा की कहावत और अनुवाद -

मातृभाषा की कहावत (जैसे राजस्थानी): "आंख्यां देख्या ई साच।"

हिंदी अनुवादः "आँखों देखा ही सच होता है।"

भाव में परिवर्तनः जब हम राजस्थानी में इसे बोलते हैं, तो इसमें एक क्षेत्रीय अधिकार और लोक-अनुभव की मिठास झलकती है। हिंदी अनुवाद अर्थ तो वही स्पष्ट करता है, लेकिन वह 'ठेट' गँवई अंदाज़ और मिट्टी की महक अनुवाद में थोड़ी कम हो जाती है। मातृभाषा में कहावतें अधिक प्रभावशाली और हृदय के करीब लगती हैं।

आशा है कि आपको कक्षा 9 हिंदी गंगा पाठ 4 "ऐसी भी बातें होती हैं" के प्रश्न-उत्तर समझने में सहायता मिली होगी।

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धन्यवाद!
By Asha Ma'am

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Milan Tomic

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