📚 कक्षा 9 हिंदी (NCERT गंगा)
पाठ 2 – “क्या लिखूँ?” (पूर्ण शिक्षण योजना)
📖 📌 पाठ का सार (Summary)
यह पाठ निबंध-लेखन की प्रक्रिया को हल्के-फुल्के व्यंग्य और हास्य के साथ प्रस्तुत करता है। लेखक बताता है कि आदर्श निबंध लिखना उतना आसान नहीं होता जितना आचार्य बताते हैं। उसे एक साथ दो विषयों—“दूर के ढोल सुहावने होते हैं” और समाज-सुधार—पर लिखने की चुनौती मिलती है। वह विभिन्न सिद्धांतों (सामग्री, शैली, रूपरेखा) को समझने की कोशिश करता है, लेकिन अंत में अपने अनुभव के आधार पर लिखने का तरीका अपनाता है। निबंध में यह बताया गया है कि दूर की चीजें हमेशा आकर्षक लगती हैं, जबकि वास्तविकता अलग होती है। साथ ही, समाज में सुधार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसका कभी अंत नहीं होता।
👤 लेखक परिचय
लेखक : हरिशंकर परसाई
हरिशंकर परसाई हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध व्यंग्यकार थे। उनकी रचनाओं में हास्य और व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक समस्याओं पर प्रकाश डाला गया है। “क्या लिखूँ?” पाठ में उन्होंने निबंध-लेखन की कठिनाइयों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है।
🎯 Learning Objectives (अधिगम उद्देश्य)
छात्र सक्षम होंगे—
- निबंध की प्रकृति, प्रकार और विशेषताओं को समझने में
- लेखक की मानसिक स्थिति और लेखन प्रक्रिया का विश्लेषण करने में
- “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” कहावत का अर्थ जीवन से जोड़ने में
- समाज-सुधार की आवश्यकता और उसकी निरंतरता को समझने में
- अपने विचारों को स्पष्ट और रचनात्मक रूप से लिखने में
- आलोचनात्मक (Critical) एवं सृजनात्मक (Creative) सोच विकसित करने में
🎯 मुख्य अवधारणाएँ (Key Concepts)
• निबंध लेखन
• सामग्री और शैली
• दूर के ढोल सुहावने होते हैं
• समाज-सुधार
• व्यंग्यात्मक शैली
• विचार अभिव्यक्ति
🎯 अधिगम परिणाम (Learning Outcomes)
इस पाठ के अंत में विद्यार्थी:
- निबंध-लेखन की प्रक्रिया को समझ पाएँगे
- लेखक के व्यंग्यात्मक एवं हास्य शैली को पहचान सकेंगे
- “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” कहावत का अर्थ समझ पाएँगे
- समाज-सुधार की अवधारणा को अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे
- स्वयं छोटे निबंध लिखने में सक्षम होंगे
🧰 सहायक सामग्री (Teaching Aids)
- पाठ्यपुस्तक (NCERT गंगा)
- ब्लैकबोर्ड / स्मार्ट बोर्ड
- चार्ट पेपर (निबंध संरचना दिखाने हेतु)
- PPT / वीडियो (यदि उपलब्ध हो)
- कहावतों और उदाहरणों के कार्ड
🧠 पूर्व ज्ञान (Previous Knowledge Questions)
शिक्षक छात्रों से प्रश्न पूछकर पूर्व ज्ञान सक्रिय करें:
- क्या आपने कभी निबंध लिखा है?
- “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” का क्या अर्थ है?
- क्या आपको लगता है कि समाज में सुधार की आवश्यकता होती है?
- निबंध लिखते समय आपको सबसे ज्यादा कठिनाई किसमें होती है?
📖 शिक्षण-अधिगम नियोजित गतिविधियाँ
🔹 प्रारंभिक गतिविधि (Introduction)
-
शिक्षक एक रोचक प्रश्न पूछें:
“अगर आपको अचानक निबंध लिखने को कहा जाए, तो आप क्या करेंगे?” - छात्रों की प्रतिक्रियाओं से विषय का परिचय दें
🔹 पाठ प्रस्तुति (Presentation)
- शिक्षक पाठ का वाचन करें
- कठिन शब्दों का अर्थ समझाएँ
- लेखक की शैली (हास्य + व्यंग्य) पर चर्चा करें
🔹 समूह गतिविधि (Group Activity)
- छात्रों को समूहों में बाँटें
-
हर समूह को एक विषय दें:
- निबंध लेखन की कठिनाइयाँ
- “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” उदाहरण सहित
- समाज-सुधार की आवश्यकता
🔹 रचनात्मक गतिविधि (Creative Task)
- छात्रों से 5-6 पंक्तियों का छोटा निबंध लिखवाएँ
- विषय: “मेरी पसंद का विषय”
🧩 दक्षताएँ / कौशल (Skills Developed)
- लेखन कौशल
- विचार अभिव्यक्ति
- आलोचनात्मक सोच
- रचनात्मकता
- भाषा कौशल
🎨 कला एकीकरण (Art Integration)
- छात्र “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” पर चित्र बनाएं
- पोस्टर बनाकर समाज-सुधार के संदेश दें
🌍 21वीं सदी के कौशल (21st Century Skills)
- Critical Thinking
- Creativity
- Communication
- Collaboration
📚 Chapter 2 Complete Study Material
📊 मूल्यांकन / आकलन (Assessment)
Formative Assessment:
- मौखिक प्रश्नोत्तर
- समूह चर्चा
- लघु निबंध लेखन
Summative Assessment:
- विषय पर 100-150 शब्दों का निबंध लिखना
- कहावत का अर्थ उदाहरण सहित लिखना
📝 HOTS Questions
- क्या आपको लगता है कि समाज-सुधार कभी पूर्ण हो सकता है? कारण सहित उत्तर दीजिए।
- “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” कहावत आज के सोशल मीडिया युग में कैसे लागू होती है?
- यदि आप लेखक की जगह होते तो किस विषय पर निबंध लिखते और क्यों?
🔄 पुनरावृत्ति (Recapitulation)
शिक्षक प्रश्न पूछें:
- निबंध लिखने के मुख्य तत्व क्या हैं?
- “दूर के ढोल सुहावने होते हैं” का संदेश क्या है?
- समाज-सुधार क्यों आवश्यक है?
🏠 गृहकार्य (Homework)
- “मेरी पसंदीदा पुस्तक” पर 100 शब्दों का निबंध लिखें
- “समाज-सुधार” पर एक पोस्टर बनाएं
- 5 कहावतें लिखें और उनके अर्थ लिखें


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