CBSE Class 9 Hindi Chapter 1 Do Bailon ki Katha (दो बैलों की कथा) Question Answers (Important) from Ganga Book
अभ्यास
रचना से संवाद
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर
चुनिए और यह भी
बताइए कि आपको ये
उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता
(ख) एकता और सहयोग
(ग) गर्व और दंभ
(घ) विद्रोह और क्रोध
उत्तरः (ख) एकता और
सहयोग
तर्क: दोनों बैल हर परिस्थिति
में एक-दूसरे का
साथ देते हैं - चाहे
साँड़ से लड़ाई हो,
दीवार तोड़ना हो या काँजीहाउस
में रुकना। मोती हीरा को
छोड़कर नहीं गया - यही
सच्ची एकता है।
2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
(क) उन्हें भरपेट
भोजन दिया गया।
(ख) उन्हें बहुत
मोटी रस्सी से बाँधा गया।
(ग) मालिक ने
बेचा, यह सोचकर उन्हें
अपमान लगा।
(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
उत्तरः (ग) मालिक ने
बेचा, यह सोचकर उन्हें
अपमान लगा।
तर्कः झूरी के साले
के यहाँ जाने पर
उन्हें लगा कि उन्हें
बेच दिया गया। अपने
घर और मालिक के
प्रति उनका लगाव था,
इसलिए उन्होंने नई जगह अपनाने
से इनकार किया।
3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
(क) कष्टों से
बचने के लिए
(ख) स्वतंत्रता प्राप्त
करने के लिए
(ग) अभिमान की
रक्षा के लिए
(घ) अपनापन पाने
के लिए
उत्तरः (घ) अपनापन पाने
के लिए
तर्क: गया के घर
न प्यार था, न ढंग
का चारा। झूरी का घर
उनका अपना था। अपनेपन
की चाहत ने उन्हें
वापस खींचा।
4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?
(क) स्वाभिमान
(ख) अहिंसा
(ग) पराधीनता
(घ) अन्याय की
रक्षा
उत्तरः (क) स्वाभिमान
तर्क: बिना कारण मार
खाना मोती को स्वीकार
नहीं था। उसने हल
लेकर भागने की कोशिश की।
यह स्वाभिमान की भावना है।
5. कहानी में बैलों की 'मूक-भाषा' का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?
(क) कहानी को
रोचक बनाने के लिए
(ख) मनुष्य जैसी
चेतना दिखाने के लिए
(ग) संवादों को
छोटा रखने के लिए
(घ) कथा में
हास्य उत्पन्न करने के लिए
उत्तरः (ख) मनुष्य जैसी
चेतना दिखाने के लिए
तर्कः मूक-भाषा के
माध्यम से लेखक यह
दर्शाना चाहते हैं कि पशुओं
में भी भावनाएँ, विचार
और चेतना होती है - जो
कभी-कभी मनुष्यों से
भी श्रेष्ठ होती है।
6. 'दो बैलों की कथा' को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
(क) भारत पर
अंग्रेजों के क्रूर और
अन्यायपूर्ण शासन के
(ख) स्वतंत्रता संग्राम
में पशुओं के योगदान के
(ग) सत्याग्रह और
अहिंसा के आंदोलन के
(घ) स्वतंत्रता के
लिए भारतीय जनता के संघर्ष
के
उत्तरः (घ) स्वतंत्रता के
लिए भारतीय जनता के संघर्ष
के
तर्क: हीरा और मोती
का अन्याय सहने के बाद
विद्रोह करना, जेल (काँजीहाउस) जाना,
और अंततः मुक्ति पाना - ये सब भारतीय
स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक हैं।
दो बैलों की कथा – संक्षिप्त सारांश | NCERT Class 9 हिंदी (गंगा) | प्रेम और मित्रता की कहानी
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मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए
प्रश्नों पर कक्षा में
चर्चा कीजिए और उनके उत्तर
लिखिए-
1. "दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।" जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
उत्तर: बैलों ने नए मालिक
के यहाँ काम करने
से इसलिए इनकार किया क्योंकि - पहली
बात यह थी कि
उन्हें लगा उन्हें बेच
दिया गया है, जो
उनके लिए अपमानजनक था।
दूसरे, गया ने उनके
साथ प्रेम और सम्मान का
व्यवहार नहीं किया। तीसरे,
उनका हृदय झूरी के
घर में था - वह
जगह उनकी अपनी थी।
बिना अपनेपन के काम करना
उन्हें स्वीकार नहीं था। यह
उनके स्वाभिमान और वफादारी का
प्रमाण है।
2. "गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।" बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे
?
उत्तर: बैलों का घर लौटना
इसलिए असाधारण था क्योंकि - उन्होंने
मजबूत पगहे तोड़े, रात
में अपरिचित रास्तों से गुजरे, और
बिना किसी मार्गदर्शन के
अपने घर पहुँचे। यह
उनकी स्मृति, बुद्धि और भावनात्मक लगाव
का प्रमाण है। झूरी के
मन में उनके प्रति
प्रेम था और बैलों
के मन में झूरी
के प्रति। यह पारस्परिक प्रेम
और वफादारी की भावना इस
घटना को अविस्मरणीय बनाती
है।
3. "मोती ने मूक-भाषा में कहा- अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!" 'कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है' इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
उत्तर: कहानी में संघर्ष की
अनिवार्यता कई स्थानों पर
दिखती है -
पहला उदाहरण: जब
गया ने बिना कारण
बैलों को मारा, तो
मोती ने हल लेकर
भागने की कोशिश की
- अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध
का पहला संकेत।
दूसरा उदाहरण: साँड़ से मुठभेड़ - यदि
दोनों मित्र संगठित होकर न लड़ते
तो जान से हाथ
धो बैठते। संघर्ष आत्मरक्षा के लिए अनिवार्य
था।
तीसरा उदाहरण: काँजीहाउस की दीवार तोड़ना
- स्वतंत्रता के लिए संघर्ष
किए बिना मुक्ति संभव
नहीं थी।
4. "जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया..." हीरा एवं मोती 'स्वतंत्रता' और 'अपनापन' दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
उत्तर: हीरा और मोती
अपनापन की भावना से
अधिक प्रेरित थे। जब वे
काँजीहाउस से भागे, तो
स्वतंत्रता मिलने के बावजूद वे
झूरी के घर की
ओर दौड़े - किसी अज्ञात जगह
नहीं गए। हीरा ने
मोती से कहा भी
- "नहीं-नहीं, दौड़कर थान पर चलो।
वहाँ से हम आगे
न जाएँगे।" यह स्पष्ट करता
है कि उनके लिए
'अपना घर' और 'अपना
मालिक' ही सर्वोपरि था।
5. "बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।" 'अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है'- क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
उत्तर: हाँ, मैं इस
कथन से पूर्णतः सहमत
हूँ। जब हम चुपचाप
अत्याचार सहते रहते हैं
तो अत्याचारी और अधिक साहसी
हो जाता है। बैलों
ने भी यही किया
- काम न करके, दीवार
तोड़कर, साँड़ से लड़कर उन्होंने
विरोध जताया। यदि वे सब
कुछ चुपचाप सहते रहते, तो
उनकी स्थिति कभी नहीं बदलती।
इतिहास भी यही सिखाता
है कि अन्याय का
विरोध न करने वाले
समाज कभी प्रगति नहीं
करते।
6. "बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों
में भाईचारा हो गया था।" हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं
के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।
उत्तरः निम्नलिखित घटनाएँ उनकी गहरी मित्रता
सिद्ध करती हैं -
पहली बातः वे हल या गाड़ी में जुते होने
पर अधिकतम बोझ खुद उठाने की कोशिश करते थे ताकि मित्र को कम कष्ट हो
दूसरी बातः साँड़ से दोनों ने मिलकर लड़ाई
की - एक अकेले नहीं लड़ा।
तीसरी बातः काँजीहाउस में जब मोती को
भागने का मौका मिला, उसने हीरा को छोड़ने से इनकार कर दिया।
चौथी बात: हीरा ने कहा "जाओ, मुझे
यहीं पड़ा रहने दो" - पर मोती बोला - "इतने दिनों साथ रहे, आज विपत्ति में
कैसे छोहूँ?"
7. "उसी समय मालकिन ने आकर दोनों
के माथे चूम लिए।" कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना
कीजिए।
उत्तरः
|
आधार
|
मालकिन
|
छोटी लड़की (भैरो की बेटी)
|
|
प्रारंभिक व्यवहार
भोजन
अंत में
भावना |
बैलों को नमकहराम कहा
सूखा भूसा देने का आदेश दिया
बैलों के माथे चूमे
स्वार्थ-मिश्रित प्रेम |
शुरू से प्रेम और करुणा दिखाई
रात को चुपके से दो रोटियाँ लाकर खिलाई
बैलों की रस्सी खोलकर भागने में मदद
की
निःस्वार्थ, सच्ची करुणा |
मेरी
कल्पना मेरे अनुमान
1. "उसने उनके माथे सहलाए और बोली-
खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ..." यदि आप उस छोटी लड़की होते, तो बैलों की
मदद किस प्रकार करते?
उत्तर: यदि मैं वह छोटी लड़की होता/होती,
तो मैं न केवल उन्हें रोटियाँ खिलाता/खिलाती, बल्कि गाँव के लोगों को उनके साथ हो रहे
अत्याचार की जानकारी देता/देती। मैं किसी बुजुर्ग या पंचायत से न्याय दिलाने की माँग
करता/करती। मैं चाहता/चाहती कि बैल झूरी के पास वापस पहुँचें, इसलिए झूरी को पत्र या
संदेश भी भेजता/भेजती।
2. "दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों
खड़े थे।" भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन
से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने
विचार लिखिए।
उत्तर: हाँ, बिल्कुल सहमत हूँ। जब काँजीहाउस
की दीवार टूटी, तो घोड़े, बकरियाँ और भैंसें भाग गईं, पर गधे डर के मारे खड़े रहे।
उनमें साहस की कमी थी। वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है - कई बार हमें अवसर मिलते
हैं, परंतु असफलता का भय और "क्या सोचेंगे लोग" का संकोच हमें जकड़े रखता
है। इसलिए निर्णायक क्षणों में साहस और दृढ़ता ज़रूरी है।
मेरे
अनुभव मेरे विचार
1. "दोस्तों में घनिष्ठता होते ही
धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी... " क्या आप इस बात से
सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
उत्तर: हाँ, मैं इस बात से पूरी तरह सहमत
हूँ। जब दोस्ती सच्ची और गहरी होती है, तो औपचारिकता खत्म हो जाती है। हम अपने घनिष्ठ
मित्रों के साथ बिना सोचे-समझे मजाक करते हैं, उन्हें छेड़ते हैं- यही घनिष्ठता की
पहचान है। मेरे जीवन में भी मेरे सबसे अच्छे मित्र के साथ यही होता है - हम एक-दूसरे
को चिढ़ाते भी हैं और ज़रूरत में साथ भी देते हैं।
2. "हीरा ने तिरस्कार किया- गिरे
हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।" "यह सब ढोंग है..." आपका इस संबंध
में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं- हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
उत्तर: मैं हीरा के विचारों के साथ हूँ।
गिरे हुए शत्रु पर वार करना कायरता है, वीरता नहीं। यह भारतीय संस्कृति के मूल्यों
के भी विरुद्ध है। जो शत्रु पराजित हो गया हो, उस पर आक्रमण करना क्रूरता है। साथ ही,
अनावश्यक हिंसा से खुद की छवि भी खराब होती है। हीरा का संयम और नैतिकता उसे महान बनाते
हैं।
3. "हम और तुम इतने दिनों एक साथ
रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?" क्या कभी
आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया
है? उस घटना के विषय में बताइए।
उत्तर: हाँ, मैंने एक बार अपने मित्र
के साथ मिलकर एक कठिन परिस्थिति का सामना किया था। मेरे मित्र की तबीयत परीक्षा के
समय खराब हो गई थी। वह बहुत परेशान था क्योंकि वह पढ़ाई नहीं कर पा रहा था। तब मैंने
उसकी मदद करने का निश्चय किया। मैं रोज़ उसके घर जाता था और उसे पढ़ाई समझाता था। हम
दोनों मिलकर धीरे-धीरे तैयारी करते रहे। आखिरकार, उसने परीक्षा दी और अच्छे अंक भी
प्राप्त किए। इस अनुभव से मुझे समझ आया कि सच्चा मित्र वही होता है जो मुश्किल समय
में साथ दे।
विद्या
से संवाद
कहानी की पड़ताल
कहानी ऐसी रचना है जिसमें जीवन के किसी
एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र,
उसकी शैली, उसका कथा-विन्यास सभी उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं। कोई कहानी वास्तविक
या काल्पनिक घटनाओं पर आधारित हो सकती है और इसमें वास्तविक या काल्पनिक पात्र भी शामिल
हो सकते हैं।
आप कहानी लेखन की इस प्रक्रिया को ध्यान
में रखते हुए एक कहानी का शीर्षक चुनिए और दिए गए मुख्य बिंदुओं को पूरा कीजिए-
उत्तरः
|
शीर्षक और लेखक
|
दो बैलों की कथा - प्रेमचंद
|
|
विषय
|
बैलों की वफादारी, स्वाभिमान, अन्याय
के विरुद्ध संघर्ष |
|
क्रिया कार्य
|
हल जोतना, गाड़ी खींचना, विद्रोह
|
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परिवेश/देश-काल और मुख्य विचार
|
ग्रामीण भारत, अंग्रेजी काल, स्वतंत्रता
संघर्ष
|
|
चरित्र/पात्र
|
हीरा, मोती, झूरी, गया, छोटी लड़की,
मालकिन
|
|
परिणाम
|
बैल घर लौट आए, झूरी ने अपनाया |
कहानी का सौंदर्य
"दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने
लगे। दोनों की पूँछ खड़ी हो गई।"
इस वाक्य को पढ़कर आँखों के सामने एक
दृश्य-सा बन जाता है। आप जानते हैं कि भाषा की इस विशेषता को चित्रात्मकता कहते हैं।
'दो बैलों की कथा' कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ हैं जो इसे अद्भुत और प्रभावपूर्ण
बनाती हैं। नीचे इस कहानी में आए कुछ विशेष बिंदुओं को उदाहरण के साथ दिया गया है।
आप भी एक-एक उदाहरण खोजकर तालिका में लिखिए-
उत्तरः
|
विशेषता
|
विशेषता का अर्थ
|
उदाहरण 1
|
उदाहरण 2 |
|
चित्रात्मक भाषा
|
शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में
स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना |
"घुटने तक पाँव कीचड़ से सने थे"
|
"सहसा घर का द्वार खुला और वही
लड़की निकली"
|
|
संवादात्मकता
|
कथा को आगे बढ़ाने के लिए पात्रों के
विचार, भाव आदि व्यक्त करने हेतु बातचीत और संवादों का प्रयोग
|
"मर जाऊँगा, पर उसके काम न आऊँगा"
|
"भागना कायरता है - नहीं, यह स्वाधीनता
है"
|
|
विरोधाभास
|
एक ही प्रसंग में दो विपरीत या परस्पर
विरोधी बातें एक साथ उपस्थित होना
|
"झूरी बैलों को देखकर स्नेह से
गदगद हो गया, पर उसकी पत्नी ने उन्हें डाँटा"
|
"स्वतंत्रता की चाह थी, पर बंधन
में रहना पड़ रहा था"
|
|
व्यंग्य
|
हास्य या कटाक्ष के माध्यम से किसी
दोष, कुरीति या अन्याय को प्रकट करना
|
"भारतीयों की अफ्रीका में क्या
दुर्दशा हो रही है?"
|
"अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर
से देते, तो शायद सभ्य कहलाते"
|
|
संघर्ष
|
दो विरोधी शक्तियों, विचारों, इच्छाओं
या परिस्थितियों का आपस में टकराना |
"उससे भिड़ना जान से हाथ धोना
है; लेकिन न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं नजर आती" |
"मोती और हीरा का अत्याचार के
विरुद्ध संघर्ष"
|
|
अतिशयोक्ति
|
किसी पात्र, घटना या भाव का वर्णन इतना
बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे
|
"झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी
न छूता था"
|
"दोनों उड़ने लगते थे मानो पंख
लग गए हों"
|
|
संदेह/उलझन
|
जब पात्र किसी निर्णय पर नहीं पहुँच
पाता और असमंजस की स्थिति में होता है
|
"सारा दिन बीत गया, खाने को एक
तिनका भी न मिला समझ में न आता था, यह कैसा स्वामी है?"
|
"अब क्या करें भागें या सहें?"
|
कहानी की रचना
प्रायः कहानी के प्रारंभ में ही कहानी
के मुख्य चरित्र, कहानी का समय, कहानी की भाषा, घटनाओं आदि के कुछ संकेत मिलने लगते
हैं। प्रेमचंद की इस कहानी में भी ऐसे संकेत हैं। आप कहानी के ऐसे संकेत/बिंदुओं को
ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तरः प्रारंभिक संकेत - गधे की तुलना,
बैलों का भाईचारा, झूरी का स्नेह,
मूक-भाषा - ये सब मुख्य भाव (वफादारी
+ संघर्ष) पहले ही दिखाते हैं।
विषयों से संवाद
कहानी का समय और समाज
'दो बैलों की कथा' कहानी जिस समय लिखी
गई थी, उस समय भारत पर अंग्रेजों का दमनकारी शासन चल रहा था। उस समय भारतीय भी अपने-अपने
ढंग से इस अंग्रेजी शासन का विरोध कर रहे थे। इस कार्य में लेखक भी किसी से पीछे नहीं
थे। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने हेतु प्रेरित
कर रहे थे। इस कहानी में से कुछ वाक्य चुनकर नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का मिलान
स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए-
उत्तरः
|
कहानी में से वाक्य
|
स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव
|
|
1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने
ही बंधन पड़ते जाएँ।
2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।
3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। 4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम
में विरोध भरा हुआ था। 5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों
की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे।
6. साँड़ पूरा हाथी है... पर दोनों
मित्र जान हथेलियों पर लेकर टपके।
|
6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए,
फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। 5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य
था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। 4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण,
सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी। 2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन
के प्रति विरोध धीरे-धीरे गहराता गया। 1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे
क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी। 3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली
था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया।
|
पशुओं के लिए कानून
नीचे दिए गए संवाद पढ़िए और प्रश्नों
के उत्तर दीजिए-
"मैं तो समझता हूँ, चुराए लिए आते
हो। चुपके से चले जाओ। मेरे बैल हैं, मैं बेचूँगा, तो बेचूँगा। किसी को मेरे बैल नीलाम
करने का क्या अधिकार है!"
"जाकर थाने में रपट कर दूँगा।"
"मेरे बैल हैं। इसका सबूत यह है
कि मेरे द्वार पर खड़े हैं।"
1. बैलों का कॉजीहाउस में बंद होना न्याय
और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
उत्तरः अन्याय - बिना चारा-पानी मारपीट;
न्याय - दंड देकर छोड़ने का प्रावधान।
2. यदि अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से
कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
उत्तरः पर्याप्त चारा-पानी, यातना न सहना,
बिना कारण न बेचना, पशु क्रूरता निवारण कानून।
3. हीरा-मोती थानाध्यक्ष को शिकायत पत्र
लिखते हैं।
उत्तरः सेवा में,
थानाध्यक्ष महोदय,
विषयः हमारे साथ हुए अन्याय के संबंध
में शिकायत
महोदय,
हमारा नाम हीरा और मोती है। हम मेहनती
और वफादार बैल हैं। हमारे साथ अत्यंत अन्याय हुआ है। हमें बिना किसी अपराध के काँजीहाउस
में बंद कर दिया गया तथा हमारे साथ मारपीट की गई। हमें पर्याप्त भोजन और पानी भी नहीं
दिया गया। हम अपने मालिक के प्रति निष्ठावान हैं और केवल अपना कर्तव्य निभाना चाहते
हैं। अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि हमारे साथ हो रहे इस अन्याय को रोका जाए तथा हमें
मुक्त किया जाए।
आपकी कृपा होगी।
भवदीय,
हीरा और मोती
हमारी धरोहर और संस्कृति
1. "वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!"
कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदा ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?
उत्तर: हीरा और मोती
ने तीन कार्य कभी
नहीं किए -
·
औरत
जात पर सींग चलाना
·
गिरे
हुए बैरी पर सींग
चलाना
·
कायरता
से भागना
2. "गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।" "लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो!" हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?
उत्तर: हीरा के इन
कथनों से निम्नलिखित भारतीय
मूल्यों की ओर संकेत
मिलता है -
·
अहिंसा:
गिरे हुए दुश्मन पर
हमला न करना (योद्धा-धर्म)
·
स्त्री
सम्मानः औरत जात पर
सींग न चलाना
·
धर्म
और नैतिकताः "हम अपना धर्म
क्यों छोड़ें?"
·
दया
और क्षमाः कमजोर या हारे हुए
पर क्रूरता न करना
·
साहस
और स्वाभिमान: अन्याय के सामने झुकना
नहीं, लेकिन नैतिक सीमा का पालन
करना
3. "दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता"
(क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर: पारंपरिक कृषि उपकरणः
·
हल:
बैलों की मदद से
खेत जोतने के लिए
·
जुआ:
बैलों की गरदन में
बाँधा जाने वाला लकड़ी
का यंत्र
·
बैलगाड़ी:
अनाज, घास, सामान ढोने
के लिए
·
कुदाल,
फावड़ा, हँसिया: खेत तैयार करने,
खरपतवार निकालने और फसल काटने
के लिए
·
लकड़ी
का लंगरः पारंपरिक हल का एक
प्रकार
आधुनिक कृषि उपकरणः
·
ट्रैक्टर:
हल जोतना, खेत तैयार करना,
गाड़ी खींचना (बहुत तेज और
कम मेहनत)
·
हार्वेस्टरः
फसल काटना और थ्रेशिंग (दाने
अलग करना) एक साथ
·
पावर
टिलरः छोटे खेतों में
जुताई के लिए
·
सीड
ड्रिलः बीज बोने के
लिए
·
पंप
सेट / स्प्रेयरः सिंचाई और दवा छिड़कने
के लिए
(ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल
किस-किस काम में सहायक होते हैं?
उत्तर: भारत में बैल
कृषि संस्कृति का प्रतीक हैं।
वे केवल पशु नहीं,
बल्कि गाँव की जीवनशैली
का हिस्सा हैं:
गाँवों में बैल के
कामः
·
खेत
जोतना (हल चलाना)
·
बैलगाड़ी
खींचना (अनाज, घास, लोग ले
जाना)
·
पूजा-अर्चना में उपयोग (बैल-पूजा, गौ-पूजा, त्योहारों
पर सजाना)
·
लोक-कथाओं, गीतों और कहानियों में
प्रतीक (जैसे "दो बैलों की
कथा")
शहरों / कस्बों में बैल के
कामः
·
कुछ
पुराने इलाकों में छोटी बैलगाड़ियाँ
अभी भी सामान ढोने
के काम आती हैं
·
मंदिरों
और धार्मिक स्थलों पर बैलों को
पूजा जाता है
·
पर्यटन
स्थलों पर बैलगाड़ी सवारी
(कुछ गाँवों/कस्बों में)
·
कृषि-आधारित उद्योगों (दूध, गोबर) में
बैल अप्रत्यक्ष रूप से सहायक
अलग-अलग और साथ-साथ
1. कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए।
(संकेत - धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)
उत्तरः
हीरा की विशेषताएँ:
·
सहनशील
- वह मोती से ज्यादा
सहनशील था। जब मोती
गाड़ी को खाई में
गिराना चाहता था, हीरा ने
संभाल लिया।
·
समझदार
और शांत - वह हमेशा मोती
को समझाता था। साँड़ से
लड़ाई के समय उसने
योजना बनाई - "मैं आगे से
रगेदता हूँ, तुम पीछे
से रगेदो।"
·
धर्मनिष्ठ
- वह नैतिकता कभी नहीं छोड़ता
था। गिरे हुए बैरी
पर सींग न चलाना,
औरत जात पर सींग
न चलाना - ये उसके सिद्धांत
थे।
·
मेहनती
और वफादार - झूरी के प्रति
पूरी निष्ठा रखता था।
मोती की विशेषताएँ:
·
गुस्सैल
- गया द्वारा डंडे मारने पर
उसका गुस्सा काबू के बाहर
हो गया और वह
हल लेकर भागा।
·
साहसी
और विद्रोही - काँजीहाउस में सबसे पहले
दीवार तोड़ने का साहस उसने
दिखाया।
·
भावुक
- हीरा को बंधा देखकर
उसकी आँखों में आँसू आ
गए।
·
मेहनती
- दोनों बैल मेहनती थे,
लेकिन मोती में विद्रोह
की चिंगारी ज्यादा थी।
2. हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं।
कैसे?
उत्तरः
समान विशेषताएँ:
·
दोनों
बहुत मेहनती थे।
·
दोनों
में भाईचारा और वफादारी थी।
·
दोनों
ने मिलकर साँड़ से लड़ा, दीवार
तोड़ी और घर लौटने
का फैसला लिया।
भिन्न विशेषताएँ:
·
हीरा
→ शांत, समझदार, सहनशील, धर्मनिष्ठ
·
मोती
→ गुस्सैल, साहसी, भावुक, विद्रोही
एक-दूसरे को
कैसे पूरा करते थे?
·
जब
मोती गुस्से में आकर सींग
चलाने या भागने को
तैयार होता, हीरा उसे रोककर
सही रास्ता दिखाता था।
·
जब
हीरा ज्यादा सहनशील होकर चुप रह
जाता, मोती उसे साहस
देता और दीवार तोड़ने
में मदद करता था।
·
साँड़
से लड़ाई में हीरा ने
योजना बनाई और मोती
ने पीछे से हमला
किया।
·
काँजीहाउस
में हीरा ने दीवार
पर पहला हमला किया,
मोती ने उसे पूरा
किया।
3. आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। सबकी आवश्यकताएँ भी थोड़ी समान और थोड़ी भिन्न हैं। बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?
उत्तरः
मैं भिन्न विशेषताओं
वाले सहपाठी से क्या चाहता
हूँ:
·
करें
- मेरी राय सुनें, मदद
करें (पढ़ाई, खेल, प्रोजेक्ट में),
मेरी कमजोरी पर हँसें नहीं,
मेरी ताकत को सराहें।
·
न
करें - मुझ पर हँसें
नहीं, मेरी बात बीच
में न काटें, मुझे
अकेला न छोड़ें।
वे मुझसे क्या
चाहते हैं (उनसे पूछकर):
·
करें
- उनकी मदद करें जब
वे अटक जाएँ, उनकी
अच्छी बातों की तारीफ करें,
टीम में शामिल करें।
·
न
करें - उनकी कमजोरी का
मजाक न उड़ाएँ, उन्हें
डाँटें नहीं।
पढ़ाई और खेल में
सहायताः
·
पढ़ाई
में - एक-दूसरे को
नोट्स शेयर करें, मुश्किल
सवाल मिलकर सुलझाएँ।
·
खेल
में - एक-दूसरे को
प्रोत्साहित करें, हारने पर सांत्वना दें।
·
साथ
दें - अलग-अलग होने
पर भी एक टीम
की तरह काम करें।
4. "दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे।" कहानी में अनेक स्थानों पर 'मूक-भाषा' का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।
उत्तर: हीरा और मोती
मनुष्यों की तरह सोचते
थे, इसलिए उनकी मूक-भाषा
बहुत स्पष्ट थी।
वे कैसे बात
करते होंगे?
·
आँखों
से इशारा - एक-दूसरे को
कनखियों में देखकर सलाह
लेना (जैसे घर भागने
की योजना बनाते समय)।
·
सींग
मिलाना - प्यार या खेल-खेल
में (विनोद के भाव से)।
·
पूँछ
हिलाना या खड़ी करना
- खुशी या उत्साह दिखाना।
·
सिर
झुकाना या चाटना - सांत्वना
देना या प्रेम व्यक्त
करना।
·
एक
साथ मुँह हटाना - एक-दूसरे की भावना समझकर
साथ खाना या साथ
रुकना।
·
गरदन
हिलाना - हाँ या नहीं
बताना।
कल्पना: जब मोती गुस्सा
करता, हीरा आँखों से
"शांत रहो" कहता। जब हीरा थक
जाता, मोती पूँछ हिलाकर
"हिम्मत रखो" कहता।
5. आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।
उत्तरः
·
मुस्कुराकर
- दोस्त से मिलते समय
खुशी दिखाना।
·
आँखों
से - क्लास में टीचर देख
रही हो तो "चुप
रहो" का इशारा।
·
हाथ
के इशारे से - "आओ", "रुको", "ठीक है" बताना।
·
सिर
हिलाकर - हाँ/नहीं जवाब
देना।
·
कंधे
पर हाथ रखकर - दुखी
दोस्त को सांत्वना देना।
·
खेल
के मैदान पर - बिना बोले
पास देना या इशारा
करना।
·
मार्ग
खोजेंगे कैसे?
1. हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?
उत्तर: हाँ, एक बार
स्कूल से पार्क जाते
समय मैं रास्ता भूल
गया था। चारों ओर
नए-नए गाँव जैसे
लग रहे थे। पहले
थोड़ा डर लगा, फिर
मैंने पास की एक
दुकान पर पूछा, "भैया,
यह कौन-सा रास्ता
है?" उन्होंने बताया। उसके बाद मैंने
फोन में गूगल मैप्स
खोलकर लोकेशन देखी और सही
रास्ता पा लिया। हीरा-मोती की तरह
मैं भी घबराया नहीं
था, बस थोड़ा सोचकर
रास्ता ढूँढ़ा।
2. यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए। कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।
उत्तरः सुरक्षित रास्ता ढूँढने के उपायः
·
शांत
रहें - घबराएँ नहीं।
·
पास
के लोगों से पूछें - पुलिस,
दुकानदार, स्कूल के टीचर, सरकारी
भवन में काम करने
वाले लोग।
·
ऑनलाइन
मानचित्र - गूगल मैप्स या
ऑफलाइन मैप्स देखें।
·
सूचना-पट और बोर्ड
- सड़क पर लगे नाम-पते, दुकानों के
बोर्ड, डाकघर देखें।
·
परिजनों
को फोन करें अगर
फोन है तो घरवालों
को बताएँ।
·
सुरक्षित
जगह चुनें - अकेले अंधेरे में न घूमें,
भीड़ वाली जगह पर
रहें।
3. आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।
उत्तरः विद्यालय के आपदा निकासी
मानचित्र (फायर एक्जिट प्लान)
पर कक्षा के सबसे निकट
फायर एक्जिट गेट या मुख्य
गेट का मार्ग सबसे
सुरक्षित है।
आमतौर पर कक्षा के
पीछे या साइड वाला
एक्जिट गेट सबसे नजदीक
होता है।
सीढ़ियाँ या मुख्य गलियारा
इस्तेमाल करें।
आपदा (आग, भूकंप) में
इस मार्ग से बाहर निकलना
चाहिए।
सृजन
1. हीरा और मोती की दैनंदिनी
कहानी में हीरा और मोती आपस में मनुष्यों की तरह बातें करते दिखते हैं। कल्पना कीजिए कि वे लिख-पढ़ भी सकते हैं। हीरा या मोती की नजर से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।
कैसे लिखें-
"आज का दिन..." से आरंभ करें।
भावनाएँ लिखें (भय, गुस्सा, दर्द)।
अंत में आशा या संकल्प लिखें।
(संकेत- "आज हमें काँजीहाउस में बंद किया गया। भूख से पेट जल रहा है। पर विश्वास है कि झूरी हमें वापस ले जाएगा।")
उत्तर: आज का दिन....
आज का दिन
सबसे काला और दुखद
रहा। सुबह से शाम
तक हमें काँजीहाउस में
बंद कर दिया गया।
मोती और मैं दोनों
भूख से व्याकुल हो
रहे थे। सारा दिन
बीत गया, एक तिनका
चारा भी नहीं मिला।
हम दोनों दीवार की नमकीन मिट्टी
चाटते रहे, फिर भी
पेट नहीं भरा।
हीरा ने नुकीले
सींग दीवार में गड़ा दिए
और जोर मारा। मिट्टी
का एक चिप्पड़ निकल
आया। मैं भी उसके
साथ लगा। चौकीदार लालटेन
लेकर आया और मुझे
डंडे मारने लगा, पर मैंने
हिम्मत नहीं हारी। मोती
ने कहा, "अब तो नहीं
रहा जाता, हीरा!" मैंने जवाब दिया, "जोर
तो मारता ही जाऊँगा, चाहे
कितने ही बंधन पड़ते
जाएँ।"
रात को हम
दोनों ने मिलकर दीवार
तोड़ दी। कई घोड़े,
बकरियाँ और भैंसें भाग
निकलीं। हमने नौ-दस
जानवरों की जान बचा
ली। अब बहुत थकान
है, बहुत भूख है,
पर विश्वास है कि झूरी
हमें ढूँढ लेगा। हम
कभी हार नहीं मानेंगे।
घर वापस पहुँचकर पुराने
थान पर खड़े होंगे।
- हीरा
2. आज के समाचार मान लीजिए आप एक स्थानीय
समाचार पत्र के संवाददाता हैं। अपने समाचार पत्र के लिए बैलों के काँजीहाउस से भागने
का समाचार लिखिए।
कैसे लिखें-
शीर्षक दें।
घटना का विवरण (कौन, कब, क्या हुआ)।
परिणाम और लोगों की प्रतिक्रिया।
(संकेत- शीर्षक हो सकता है: "दो
बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ")
उत्तरः शीर्षक: दो बहादुर बैलों ने तोड़ी
बेड़ियाँ! काँजीहाउस से भाग निकले हीरा-मोती
समाचार: कानपुर जिले के काँजीहाउस में
कल रात एक अद्भुत घटना घटी। झूरी नामक किसान के दो बैल - हीरा और मोती -जो कई दिनों
से बिना चारे-पानी के बंद थे, उन्होंने अपनी मूक-भाषा में सलाह की और कच्ची दीवार में
सींग गड़ाकर लगातार दो घंटे तक जोर आजमाया। आखिरकार दीवार ऊपर से लगभग एक हाथ गिर गई।
इसके बाद हीरा-मोती बाहर निकल आए। उनके
साथ कई घोड़े, बकरियाँ और भैंसें भी भाग निकलीं। गाँव में खुशी का माहौल है। लोग बैलों
की बहादुरी की तारीफ कर रहे हैं। झूरी ने दावा किया, "ये मेरे बैल हैं। मैं उन्हें
कभी बेचता ही नहीं।" गया और दढ़ियल अब भी उन्हें ढूँढ रहे हैं, पर बैल अब अपने
थान पर सुरक्षित पहुँच चुके हैं।
परिणामः बैलों की इस घटना
ने पूरे गाँव में
पशु-वफादारी और संघर्ष की
मिसाल पेश की है।
3. कहानी का नया अंत
यदि बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत लिखिए।
कैसे लिखें-
बैलों की नई जगह।
झूरी की स्थिति।
(संकेत- "हीरा और मोती अब एक बूढ़े किसान के घर शांति से रह रहे हैं।")
उत्तर: यदि बैल वापस
न लौटते तो कहानी का
अंत इस प्रकार होता:
हीरा और मोती
अब एक बूढ़े किसान
के घर शांति से
रह रहे हैं। वहाँ
उन्हें भरपेट खली-भूसा, चोकर
और मीठा पानी मिलता
है। बूढ़ा किसान उन्हें रोज सहलाता है।
दोनों बैल कभी-कभी
पुराने थान की याद
करते और आह भरते
हैं। झूरी उन्हें ढूँढते-ढूँढते थक गए। गया
और दढ़ियल अब भी उन्हें
खोज रहे हैं, पर
बैल अब स्वतंत्र और
खुश हैं। छोटी लड़की
(जो रोटियाँ खिलाती थी) उन्हें याद
करती है और कहती
है, "काश वे वापस
आ जाते!"
हीरा मोती से
कहता, "भाई, अपनापन सबसे
बड़ी आजादी है।" दोनों अब शांति से
रहते हैं, पर कभी-कभी झूरी के
थान की याद उन्हें
उदास कर देती है।
4. चित्रकथा लेखन
नीचे 'दो बैलों की कथा' की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए। प्रत्येक घटना
के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम दोनों वाक्य लिखिए।
कैसे लिखें-
हर चित्र के लिए एक छोटा संवाद बनाकर लिखिए।
क्रम का ध्यान रखें- बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आज़ादी।
(संकेत- चित्र 4: "अब हम आज़ाद हैं!")
उत्तरः चित्र 1: बैल खेत में
अन्य जानवरों के साथ खड़े
हैं।
संवादः हीरा - "मोती, यहाँ तो बहुत
जानवर हैं, पर कोई
चारा नहीं।"
मोती - "हाँ भाई, हमारी
तरह सब भूखे हैं।"
घटनाक्रमः काँजीहाउस में बंदी की
शुरुआत।
चित्र 2: दो बैल सोचते
हुए, सिर झुकाए।
संवादः हीरा - "अब तो नहीं
रहा जाता मोती!"
मोती - "दीवार तोड़कर भाग चलें?"
घटनाक्रमः योजना बनाना।
चित्र 3: बैल दीवार तोड़ते
हुए (सींग गड़ाकर मिट्टी
गिर रही है)।
संवादः हीरा - "जोर लगाओ भाई!"
मोती - "दीवार गिर रही है!"
घटनाक्रमः दीवार तोड़ना।
चित्र 4: बैल भागते हुए,
हिरण पास में।
संवादः मोती - "अब हम आजाद
हैं!"
हीरा - "हाँ, अब घर
चलते हैं।"
घटनाक्रमः भागना और आजादी।
भाषा
से संवाद
मेरे शब्द
कहानी में से पाँच ऐसे शब्द चुनकर लिखिए जो आपके लिए बिल्कुल नए हैं। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुसार लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
उत्तरः
निरापद → अनुमानः सुरक्षित शब्दकोशः आपत्ति से रहित, निर्विघ्न
सहिष्णुता अनुमानः सहनशीलता → शब्दकोश: सहनशीलता, क्षमा
पराकाष्ठा → अनुमानः अंतिम सीमा → शब्दकोश: चरम कोटि, अंतिम
सीमा
उजड्डडुपन → अनुमानः बदतमीजी शब्दकोशः अशिष्टता, उद्दंडता
बेतहाशा → अनुमान: तेजी से→ शब्दकोश:
बदहवास होकर, बिना सोचे-विचारे
भाषा
गढ़ते मुहावरे
"लोग आ-आकर
उनकी सूरत देखते और
मन फीका करके चले
जाते।"
"मन फीका करना"
एक मुहावरा है जिसका अर्थ
आपको वाक्य पढ़कर समझ में आ
ही गया होगा। इसी
से मिलते-जुलते मुहावरे हैं- जी फीका
होना, जी टूटना होना
आदि। 'दो बैलों की
कथा' कहानी में कई मुहावरों
का बहुत ही सुंदर
और सटीक प्रयोग हुआ
है।
कहानी में से चुनकर
कुछ वाक्य नीचे दिए गए
हैं। इन वाक्यों में
मुहावरों को पहचानकर रेखांकित
कीजिए।
इन मुहावरों का
प्रयोग करते हुए नए
वाक्य बनाकर लिखिए-
1. "झूरी के साले
गया को घर तक
गाड़ी ले जाने में
दाँतों पसीना आ गया।"
2. "उसका चेहरा देखकर
अंतर्मन से दोनों मित्रों
के दिल काँप उठे।"
3. "झूरी की स्त्री
ने बैलों को द्वार पर
देखा, तो जल उठी।"
4. "मोती का दिल
ऐंठकर रह गया।"
5. "आएगा तो दूर
ही से खबर लूँगा,
देखूँ कैसे ले जाता
है।"
6. "जो जी तोड़कर
काम करते हैं, किसी
से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार
बातें सुनकर गम खा जाते
हैं।"
7. "अगर ये भी
ईंट का जवाब पत्थर
से देना सीख जाते,
तो शायद सबक सिखा
देते।"
8. "तो फिर क्यों
कहते हो, मरना बुरा
नहीं होता है?"
उत्तरः
1. दाँतों पसीना आ गया - बहुत
मेहनत करना नया वाक्य:
बोर्ड परीक्षा की तैयारी में
दाँतों पसीना आ गया।
2. दिल काँप उठे
- डर जाना नया वाक्य:
साँप देखकर दिल काँप उठा।
3. जल उठी - क्रोध
करना नया वाक्य: बात
सुनकर वह जल उठी।
4. दिल में ऐंठकर
रह गया - गुस्सा रोकना नया वाक्य: टीचर
की डाँट सुनकर दिल
में ऐंठकर रह गया।
5. दूर ही से
खबर लूँगा - सावधानी से देखना नया
वाक्य: आने वाले को
दूर से खबर लूँगा।
6. गम खा जाते
- चुप रहकर सहना नया
वाक्यः गाली सुनकर गम
खा गया।
7. ईंट का जवाब
पत्थर - बदला लेना नया
वाक्यः गलती पर ईंट
का जवाब पत्थर से
दिया।
8. नौ-दो-ग्यारह
- भाग जाना नया वाक्य:
डाँट सुनकर नौ-दो-ग्यारह
हो गया।
गतिविधियाँ
1. कविता (गीत) और अभिनंदन-पत्र
"बाल-सभा ने निर्णय किया, दोनों पशुओं को अभिनंदन-पत्र देना चाहिए।"
(क) मान लीजिए कि बाल-सभा ने हीरा और मोती की प्रशंसा में एक गीत लिखा और गाया। उसकी कल्पना से वह गीत लिखिए।
उत्तर: कविता (गीत)
हीरा-मोती दो
भाई
हीरा-मोती दो
भाई, वफादारी की मिसाल ।
रस्सी तोड़ी, दीवार फोड़ी, साँड़ से लड़े डटकर।
झूरी के थान
पर लौट आए, पूँछ
हिलाई खुशी से।
पशु भी सिखाते
इंसान को - संघर्ष और
अपनापन।
(ख) हीरा और मोती के लिए अभिनंदन-पत्र लिखिए।
उत्तरः अभिनंदन-पत्र
प्रिय हीरा और मोती,
तुम दोनों पशु-वीर हो!
रस्सी तोड़कर, साँड़ से लड़कर, काँजीहाउस
की दीवार फोड़कर तुमने साहस और भाईचारे
का उदाहरण पेश किया। हम
बाल-सभा तुम्हें अभिनंदन
देते हैं।
- गाँव के बच्चे
2. बाल सभा में भाषण
मान लीजिए कि आपके बाल-सभा में हीरा-मोती के लौटने के बाद भाषण देने के इच्छुक सदस्य हैं। भाषण का विषय है-"पशुओं के अधिकार"। अपना भाषण लिखिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तरः विषयः पशुओं के अधिकार
प्रिय साथियों, कहानी "दो बैलों की
कथा" सिखाती है कि पशु
भी भावनाएँ रखते हैं। हीरा-मोती ने भूख,
मार और कैद सहकर
विद्रोह किया। हमें पशु क्रूरता
रोकनी चाहिए, उन्हें चारा-पानी देना
चाहिए और सम्मान देना
चाहिए। पशु हमारे भाई
हैं। जय हिंद!
3. शीर्षक
इस कहानी के पाँच भाग हैं। कहानी के प्रत्येक भाग को अपने मन से उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तरः
·
भाग
1: घर से बिकना
·
भाग
2: विद्रोह की शुरुआत
·
भाग
3: साँड़ से संघर्ष
·
भाग
4: काँजीहाउस में कैद
·
भाग
5: विजय और घर वापसी
मेरी
पहेली
अपने समूह के
साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ
हीरा, झूरी, मोती, गया, बैल, घर,
रस्सी, रोटी
उत्तरः
1. दो भाई खेत में काम करें, ताकत जिनकी सबसे खास,
नाम में चमक झलके जिसकी, बताओ वह कौन है ख़ास?
उत्तर: हीरा
2.
अपने पशुओं से करता प्यार, उनको समझे परिवार,
जिसके घर में बैल रहे, बताओ वह कौन है यार?
उत्तर: झूरी
3.
हीरे का साथी, मजबूत और मोटा,
नाम सुनते ही लगता जैसे कोई छोटा-मोटा!
उत्तर: मोती
4. साले का नाम, जो ले गया बैल,
काम कराए खूब, नहीं करता मेल।
उत्तर: गया
5. खेत जोतें, गाड़ी खींचें,
मेहनत से कभी न पीछे।
बताओ वह कौन जानवर भई?
उत्तर: बैल
6. जहाँ मिले आराम और प्यार,
लौटे सब दिन भर के बाद बार-बार।
उत्तर: घर
7. जिससे बँधते पशु बेचारे,
तोड़ भागे हीरा-मोती प्यारे।
उत्तर: रस्सी
8. छोटी-सी चीज़, भूख मिटाए,
लड़की रोज़ प्यार से खिलाए।
उत्तर: रोटी
भाषा
संगम
"कभी-कभी अड़ियल
बैल भी देखने में
आता है।"
नीचे 'बैल' शब्द के
लिए संविधान की आठवीं अनुसूची
में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं
में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी
गई है-
बैल (हिंदी), गड्डु
(संस्कृत), बॉल्द (पंजाबी), बेल (उर्दू), बोंद
(कश्मीरी), हमो (सिंधी), बला
(मराठी), बडद (गुजराती), बेल
(कोंकणी), गोड़ (नेपाली), बलद (बांग्ला), गोंड,
वलद (असमिया), रसा बलद (मणिपुरी),
बलद (ओड़िया), एण्टु (तेलुगु), पांडु (तमिल), कळो (मलयालम), एरुथु
(कन्नड़)
इन शब्दों की
सूची में 'बैल' शब्द
के लिए किसी और
भाषा में भी जानने
हों तो उस भाषा
में भी लिखिए।
उपयुक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा
में भी लिखिए।
https://shabd.education.gov.in/lexicon.jsp
उत्तरः (मैं हिंदी-भाषी
क्षेत्र से हूँ, इसलिए
अतिरिक्त भाषा के रूप
में अवधी में लिख
रहा हूँ, जो उत्तर
प्रदेश में बोली जाती
है)
अवधी बैल (या
लोक-बोली में बइल
/ सांड)
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा
में भी लिखिए।
मातृभाषा (हिंदी): "कभी-कभी अड़ियल
बैल भी देखने में
आता है।"
अवधी (स्थानीय बोली): "कभ-कभ अड़ियल
बैल भी देखे में
आवे है।"
अगर आपकी मातृभाषा हरियाणवी है, तो:
“कदे-कदे जिद्दी बैल भी देखण में आवे सै।”
अगर भोजपुरी:
“कभी-कभी हठी बइलो देखे के मिलेला।”
“दो बैलों की कथा” के ये प्रश्न-उत्तर विद्यार्थियों को पाठ की गहराई से समझ विकसित करने में मदद करते हैं। नियमित अभ्यास से आप परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। अगर यह पोस्ट उपयोगी लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।

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