CBSE Class 7 Hindi Chapter 5 Nahi Hona Bimar (नहीं होना बीमार) Question Answers from Malhar Book
पाठ से
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. बच्चे के विद्यालय न जाने का मुख्य कारण क्या था?
उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था। (★)
उसका साबुनदानी की खीर खाने का मन था।
उसने गृहकार्य नहीं किया था। (★)
उसे बुखार हो गया था।
2. कहानी के अंत में बच्चे ने कहा, "इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।" बच्चे ने यह निर्णय लिया क्योंकि -
घर में रहने के बजाय विद्यालय जाना अधिक रोचक है।
बीमारी का बहाना बनाने से साबुनदानी की खीर मिलती है।
झूठ बोलने से झूठ के खुलने का डर हमेशा बना रहता है।
इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और चुप रहना पड़ा। (★)
3. "लेटे-लेटे पीठ दुखने लगी।" इस बात से बच्चे के बारे में क्या पता चलता है?
उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई। (★)
उसे अपनी बीमारी की कोई चिंता नहीं रह गई थी।
वह बिस्तर पर आराम करने का आनंद ले रहा था।
बीमारी के कारण उसकी पीठ में दर्द हो रहा था।
4. "क्या ठाठ है बीमारियों में!!!" के मन में यह बात आई क्योंकि -
बीमार व्यक्ति को बहुत आराम करने को मिलता है।
बीमार व्यक्ति को अच्छे खाने को आनंद मिलता है।
बीमार व्यक्ति को विद्यालय नहीं जाना पड़ता है।
बीमार व्यक्ति अस्पताल में शांति से लेटा रहता है। (★)
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर क्यों चुने?
उत्तरः चर्चा के लिए सुझावः
1. मैंने पहले प्रश्न में दो विकल्प इसलिए चुने क्योंकि बच्चा खुद सोचता है कि उसका स्कूल जाने का मन नहीं है और वह होमवर्क भी नहीं करता, इसलिए स्कूल से बचना चाहता है।
2. दूसरे प्रश्न का उत्तर इसीलिए चुना क्योंकि कहानी में बच्चा दिन भर अकेलापन, भूख और ऊब का अनुभव करता है जिससे उसे पछतावा होता है।
3. तीसरे में पीठ दुखने का कारण बीमारी नहीं, बल्कि लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहना है, जिससे ऊब भी झलकती है।
4. चौथे में बच्चा बीमारों के ठाठ देखकर आकर्षित होता है उसे लगता है कि उन्हें आराम, अच्छा खाना और स्कूल से छुट्टी मिलती है।
ALSO CHECK -
पाठ 5 नहीं होना बीमार KWL CHART
पाठ 5 नहीं होना बीमार Concept map
पाठ 5 नहीं होना बीमार प्रश्न उत्तर
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इनके इतने सही अर्थों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने परिजनों और शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तरः
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए -
(क) "मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिलकुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं।"
उत्तरः यह पंक्ति बच्चे की मासूम और चालाक सोच को दर्शाती है। उसने स्कूल का होमवर्क नहीं किया था और सज़ा से बचने के लिए बीमारी का झूठा बहाना बनाने की योजना बना ली। इस वाक्य में हास्य भी छिपा है क्योंकि कोई जान-बूझकर बीमार नहीं होता, लेकिन बच्चा सोचता है कि बीमारी एक मज़ेदार तरीका है स्कूल से छुट्टी पाने का। यह पंक्ति दिखाती है कि कभी-कभी बच्चे कितनी सहजता से झूठ का सहारा ले लेते हैं।
(ख) "देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा। कि तुम्हें क्या खाएँगे? पूछते तो मैं साबुनदाने की खीर ही तो माँगता। कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता ! लेकिन नहीं। भूखे रहो !! इससे सारे विकार निकल जाएँगे। विकार निकल जाएँ ! बस ! इस चक्कर में तुम खुद सिर्फ सो जाओ।"
उत्तरः यह पंक्ति बच्चे के मन में उपजी पीड़ा, क्रोध और निराशा को प्रकट करती है। उसे उम्मीद थी कि बीमार होने पर उसे स्वादिष्ट खीर खाने को मिलेगी, लेकिन उल्टा उसे भूखे रहने को कहा गया। यहाँ "ताजमहल" शब्द का उपयोग एक व्यंग्यात्मक तुलना के रूप में किया गया है वह कह रहा है कि उसने कोई बड़ी चीज़ नहीं माँगी थी, बस एक खीर ही तो माँगी थी। यह पंक्ति झूठ बोलने के नतीजों पर गहरा कटाक्ष करती है और यह भी दिखाती है कि कैसे उसकी कल्पना और वास्तविकता में बड़ा अंतर है।
सोच-विचार के लिए
पाठ को एक बार फिर ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-
(क) अस्पताल में बच्चे को कौन-कौन सी अच्छी लगीं और क्यों?
उत्तरः अस्पताल में बच्चे को वहाँ की सफ़ाई, शांति और अनुशासन अच्छा लगा। बड़े-बड़े हरे पेड़ों वाले खुले वातावरण और साफ़ बिस्तरों ने उसे प्रभावित किया। उसे लगा कि वहाँ कोई शोर नहीं है, कोई गंदगी नहीं है, और बीमारों को विशेष देखभाल मिलती है।
(ख) कहानी के अंत में बच्चे को महसूस हुआ कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। क्या आपको लगता है कि उसका निर्णय सही था? क्यों?
उत्तरः हाँ, बच्चे का निर्णय बिल्कुल सही था क्योंकि उसने झूठ बोलकर बीमारी का बहाना बनाया और पूरा दिन अकेले, भूखे और परेशान होकर बिताया। उसे यह अनुभव हुआ कि स्कूल जाना ज्यादा अच्छा था जहाँ उसके दोस्त, खेल और मस्ती थी। यह अनुभव उसे जीवन में सच्चाई और जिम्मेदारी का महत्व सिखाता है।
(ग) जब बच्चा बीमार पड़ने का बहाना बनाकर बिस्तर पर लेटा रहा तो उसके मन में कौन-कौन से भाव आ रहे थे?
(संकेत - मन में उत्पन्न होने वाले विकार या विचार को भाव कहते हैं, उदाहरण के लिए- क्रोध, दुःख, भय, करुणा, प्रेम आदि।)
उत्तरः बच्चे के मन में कई भाव एक साथ आ रहे थे, जैसे-
क्रोधः जब किसी ने उसे खाने के लिए नहीं पूछा।
ईर्ष्याः जब मुन्नू आम खा रहा था।
उदासी और अकेलापनः जब सब चले गए और वह अकेला रह गया।
पछतावाः जब उसे लगा कि स्कूल चला जाता तो बेहतर होता।
झुंझलाहट और ऊबः जब वह लेटे-लेटे परेशान हो गया।
(घ) कहानी में बच्चे ने सोचा था कि "ठाठ से साफ़-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबदाने की खीर खाते रहो।" आपको क्या लगता है, असल में बीमार हो जाने और इस बच्चे की सोच में कौन-कौन सी समानताएँ और अंतर होंगी?
(संकेत - आप अपने अनुभवों के आधार पर इस प्रश्न पर विचार कर सकते हैं कि कहानी वाले बच्चे की कल्पना वास्तविकता से कितनी अलग है।)
उत्तरः
समानताएँः बच्चा सोचता है कि बीमार होने पर आराम मिलता है, बिस्तर मिलता है, और स्वादिष्ट चीजें खाने को मिलती हैं - यह कुछ हद तक सही है।
अंतरः वास्तव में बीमार होना सुखद नहीं होता। शरीर दुखता है, भूख नहीं लगती, दवा और काढ़ा पीना पड़ता है। बच्चे की कल्पना केवल आराम और स्वाद पर केंद्रित थी, लेकिन असल में बीमारी में दुख और असहायता होती है। उसकी कल्पना हकीकत से काफी अलग थी।
(ङ) नानीजी और नानाजी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खाना नहीं दिया गया। क्या आपको लगता है कि उन्होंने सही किया? आपको ऐसा क्यों लगता है?
उत्तरः हाँ, उन्होंने सही किया क्योंकि उन्होंने बच्चे की देखभाल की और उसका इलाज किया जैसा कि सामान्य बीमारी में किया जाता है। उन्होंने यह भी देखा कि बच्चा झूठ बोल रहा है, फिर भी उसे सबक सिखाने के लिए उन्होंने उसे भूखा रखा ताकि वह समझ सके कि बीमारी का बहाना बनाना मज़ाक नहीं है। यह निर्णय बच्चे को जीवन का सच्चा अनुभव देता है।
अनुमान और कल्पना से
(क) कहानी के अंत में बच्चा नानाजी और नानीजी को सब कुछ सच-सच बताने का निर्णय कर लेता तो कहानी में आगे क्या होता?
(संकेत - उसका दिन कैसे बदल जाता? उसकी सोच और अनुभव कैसे होते?)
उत्तरः अगर बच्चा नानीजी और नानाजी को सच-सच बता देता कि वह झूठ बोलकर बीमारी का बहाना बना रहा था, तो शायद वे पहले तो थोड़ा नाराज़ होते लेकिन फिर समझदारी से उसे समझाते। उसका दिन भूखे और दुखी रहने के बजाय संवाद और समझदारी में बीतता। उसे यह अनुभव और भी गहराई से होता कि ईमानदारी सबसे बेहतर नीति है, और वह भविष्य में और अधिक जिम्मेदार बनता।
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(ख) कहानी में बच्चे की नानीजी के स्थान पर आप हैं। आप सारे नाटक को समझ गए हैं लेकिन चाहते हैं कि बच्चा सारी बात आपको स्वयं बता दे। अब आप क्या करेंगे?
(संकेत- इस सवाल में आपको नानीजी की जगह सोचना है और एक मनोरंजक योजना बनानी है जिससे बच्चा आपको स्वयं सारी बातें बता दे।)
उत्तरः अगर मैं नानीजी की जगह होती, तो मैं बच्चे से खेल-खेल में बात करती। मैं उसे कहानी या खेल के माध्यम से झूठ और सच्चाई पर चर्चा में उलझा देती और धीरे-धीरे उससे पूछती का होमवर्क नहीं हुआ?" "क्या तुम्हें सच में बुखार है?" या "सच-सच बताओ, क्या स्कूल
मैं ऐसा माहौल बनाती कि वह डरने की बजाय खुद से सच्चाई बता दे। शायद मैं उससे कहती- "जो बच्चा झूठ नहीं बोलता उसे मेरी स्पेशल खीर मिलती है।"
(ग) कहानी में बच्चे के स्थान पर आप हैं और घर में अकेले हैं। अब आप ऊबने से बचने के लिए क्या-क्या करेंगे?
उत्तरः अगर मैं बच्चे की जगह होता और घर में अकेला होता, तो मैं कुछ किताबें पढ़ता, ड्राइंग करता, अपनी कॉपी-पेंसिल सजाता, कोई छोटी-सी कहानी लिखता या चुपचाप खिड़की से बाहर का दृश्य देखकर कल्पनाएँ करता।
मैं अपने मन को सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में लगाकर ऊब को दूर करता।
(घ) कहानी के अंत में बच्चे को लगा कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। कल्पना कीजिए, अगर वह स्कूल जाता तो उसका दिन कैसा होता? अगले दिन जब वह स्कूल गया होगा तो उसने क्या-क्या किया होगा?
उत्तरः अगर वह स्कूल चला जाता, तो वह अपने दोस्तों से खेलता, टीचर की डाँट के बावजूद कुछ सीखता, recess में अमरूद खाता और दिन का आनंद लेता।
अगले दिन वह अपने दोस्तों से क्षमा माँगता, उनसे होमवर्क कॉपी करता और मन लगाकर पढ़ाई करता। शायद वह अब झूठ से बचने की ठान लेता।
(ङ) कहानी में नानाजी और नानीजी ने बच्चे की बीमारी ठीक करने के लिए उसे दवाई दी और खाने के लिए कुछ नहीं दिया। अगर आप नानीजी या नानाजी की जगह होते तो क्या करते?
उत्तरः अगर मैं उनकी जगह होता, तो मैं दवा तो ज़रूर देता, लेकिन थोड़ी सहानुभूति भी दिखाता। मैं यह समझने की कोशिश करता कि बच्चा झूठ क्यों बोल रहा है। मैं उसे भूखा रखने की बजाय हल्का-फुल्का खाना देता और उसके साथ बात करके सच्चाई जानने की कोशिश करता।
मैं उसे यह भी समझाता कि झूठ बोलने से न सिर्फ परेशानी होती है, बल्कि विश्वास भी टूटता है।
कहानी की रचना
"अस्पताल का माहौल मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे। न ट्रैफिक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी...! सिर्फ़ लोगों के धीरे-धीरे बातचीत करने की धीमी-धीमी गुनगुना बाकी एकदम शांति।"
इन पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों में ऐसा लग रहा है मानो हमारी आँखों के सामने अस्पताल का चित्र-सा बन गया हो। लेखन में इसे 'चित्रात्मक भाषा' कहते हैं। अनेक लेखक अपनी रचना को रोचक और सरस बनाने के लिए उपयुक्त स्थानों पर अनेक वस्तुओं, कार्यों, स्थानों आदि का विस्तार से वर्णन करते हैं।
लेखक ने इस कहानी को सरस और रोचक बनाने के लिए और भी अनेक तरीकों का उपयोग किया है। उदाहरण के लिए, उन्होंने कहानी में 'बच्चे द्वारा कल्पना करने' का भी प्रयोग किया है (जब बच्चा अकेले लेटे-लेटे घर और बाहर के लोगों के बारे में सोच रहा है)। इस कहानी में ऐसी कई विशेषताएँ छिपी हैं।
(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस पाठ की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तरः इस पाठ की अन्य विशेषताओं की सूचीः
1. चित्रात्मक भाषा का प्रयोग जैसे अस्पताल का शांत वातावरण।
2. बच्चे की कल्पना शक्ति का उपयोग जैसे बाहर के लोगों की गतिविधियाँ सोचना।
3. हास्यात्मक शैली जैसे ताजमहल नहीं माँगा, केवल खीर माँगी थी। -
4. आत्मसंवाद (Self-talk) बच्चा खुद से बातें करता है।
5. मानव स्वभाव का चित्रण लालच, पछतावा, ईर्ष्या, सत्य का बोध।
6. व्यंग्य का प्रयोग - "भूखे रहो! इससे सारे विकार निकल जाएंगे।"
7. संदेशात्मक अंत - झूठ बोलने से पछताना पड़ता है।
(ख) कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखिए -
उत्तरः
समस्या और समाधान
कहानी को एक बार पुनः पढ़कर पता लगाइए-
(क) बच्चे के सामने क्या समस्या थी? उसने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
समस्याः
बच्चे ने स्कूल का गृहकार्य (होमवर्क) नहीं किया था और उसे डर था कि स्कूल में सज़ा मिलेगी।
समाधानः
इस समस्या से बचने के लिए बच्चे ने बीमारी का बहाना बनाया, और स्कूल न जाकर दिनभर बिस्तर में लेटे रहने का नाटक किया।
(ख) नानीजी-नानाजी के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
समस्याः
नानीजी-नानाजी को संदेह था कि बच्चा वास्तव में बीमार नहीं है लेकिन वह झूठ बोलकर बीमारी का ढोंग कर रहा है।
समाधानः
उन्होंने बच्चे को दवाई और काढ़ा देकर उसकी बीमारी का इलाज किया, लेकिन खाना नहीं दिया और उसे आराम करने को कहकर छोड़ दिया ताकि बच्चा झूठ बोलने के परिणाम को खुद समझे।
शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए स्थानों में 'बीमार' से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए-
खोजबीन
कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि-
(क) कहानी में सर्दी के मौसम की घटनाएँ बताई गई हैं।
"मैं रजाई से निकला ही नहीं।"
"न चाहते हुए भी मुझे कड़वी पुड़िया खानी पड़ी और काढ़े जैसी चाय पीनी पड़ी।"
(ख) बच्चे को बहाना बनाने के परिणाम का आभास हो गया।
"इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।"
(ग) बच्चे को खाना-पीना बहुत प्रिय है।
"खाने ही खाने की चीजें दिखाई देतीं गरमागरम खस्ता कचौड़ी, मावे की बर्फी, बेसन की चक्की, गोलगप्पे।"
"पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता, कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता !"
(घ) बच्चे को स्कूल जाना अच्छा लगता है।
"इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता। सजा मिलती तो मिल जाती।"
शीर्षक
(क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम "नहीं होना बीमार" है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि इस कहानी का यह नाम उपयुक्त है या नहीं। अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
उत्तरः हाँ, यह नाम उपयुक्त है क्योंकि कहानी का मुख्य संदेश यही है कि बीमारी का झूठा बहाना बनाना गलत है और बीमार होना कोई मज़े की बात नहीं है। बच्चा जब खुद अनुभव करता है कि बीमारी में आराम की बजाय परेशानी होती है, तब वह यह निर्णय लेता है कि "बीमार नहीं होना चाहिए।"
(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।
नया शीर्षक: "बहाने का फल" या "खीर का झाँसा"
कारणः क्योंकि बच्चा बीमारी का बहाना बनाता है और खीर खाने की कल्पना करता है, लेकिन उसका परिणाम उल्टा होता है।
अभिनय
कहानी में से चुनकर कुछ संवाद नीचे दिए गए हैं। आपको इन्हें अभिनय के साथ बोलकर दिखाना है। प्रत्येक समूह से बारी-बारी छात्र/छात्राएँ कक्षा में सामने आएँगे और एक संवाद अभिनय के साथ बोलकर दिखाएँगे -
1. "बुखार आ गया।" - (कराहते हुए)
2. "आपको पता नहीं चल रहा। थर्मामीटर लगाकर देखिए।" - (थोड़ी चिढ़ से)
3. "मेरे सिर में दर्द हो रहा है। पेट भी दुख रहा है और मुझे बुख़ार भी है।" - (दुखी और थका हुआ स्वर)
4. "अब कैसा है सिरदर्द ?" - (नानाजी की उत्सुक आवाज़ में)
5. "आज इसे कुछ खाने को मत देना। आराम करने दो। शाम को देखेंगे।" - (निर्णायक आवाज़ में)
चेहरों पर मुस्कान, मुँह में पानी
(क) इस कहानी में अनेक रोचक घटनाएँ हैं जिन्हें पढ़कर चेहरे पर मुस्कान आ ही जाती है। इस कहानी में किन बातों को पढ़कर आपके चेहरे पर भी मुस्कान आ गई थी? उन्हें रेखांकित कीजिए।
उत्तरः मुस्कान लाने वाली पंक्तियाँ (उदाहरण):
"क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!"
"पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता, कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता!"
"भुक्खड़ कहीं का!" (जब वह मुन्नू को आम चूसते देखता है)
(ख) इस कहानी में किन वाक्यों को पढ़कर आपके मुँह में पानी आ गया था? उन्हें रेखांकित कीजिए।
(इन्हें रेखांकित करने के लिए आप किसी अन्य रंग का उपयोग कर सकते हैं।)
उत्तरः मुँह में पानी लाने वाली पंक्तियाँ (उदाहरण):
"गरमागरम खस्ता कचौड़ी... मावे की बर्फी... बेसन की चक्की... गोलगप्पे।"
"अरहर की दाल में हींग-जीरे का बघार, ऊपर से हरा धनिया और थोड़ा सा देसी घी..."
"तली हुई हरी मिर्च को दाल-चावल में मसलकर खा रहे हैं..."
लेखन के अनोखे तरीके
मैं बिना आवाज़ किए दरवाज़े तक गया और ऐसे झाँककर देखने लगा जिससे किसी को पता न चले कि मैं बिस्तर से उठ गया हूँ।
इस बात को कहानी में इस प्रकार विशेष रूप से लिखा गया है-
"दबे पाँव दरवाज़े तक गया और चुपके से झाँककर देखा।"
इस कहानी में अनेक स्थानों पर वाक्यों को विशेष ढंग से लिखा गया है। साधारण बातों को कुछ अलग तरह से लिखने से लेखन की सुंदरता बढ़ सकती है।
नीचे कुछ वाक्य दिए गए हैं। कहानी में ढूंढ़िए कि इन बातों को कैसे लिखा गया है-
विराम चिह्न
"देखें!" नानाजी ने रजाई हटाकर मेरा माथा छुआ। पेट देखा और नब्ज़ देखने लगे।
इस बीच नानीजी भी आ गई। "क्या हुआ?", नानीजी ने पूछा।
पिछले पृष्ठ पर दिए गए वाक्यों को ध्यान से देखिए। इन वाक्यों में आपको कुछ शब्दों से पहले या बाद में कुछ चिह्न दिखाई दे रहे हैं। इन्हें विराम चिह्न कहते हैं।
अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए विराम चिह्न को कहानी में ढूंढ़िए। ध्यानपूर्वक देखकर समझिए कि इनका प्रयोग वाक्यों में कहाँ-कहाँ किया गया है। आपने जो पता किया, उसे नीचे लिखिए-
आवश्यकता हो तो इस प्रश्न का उत्तर पता करने के लिए आप अपने परिजनों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।
कैसी होगी गली
"मुझे बड़ी तेज़ इच्छा हुई कि इसी समय बाहर निकलकर दिन की रोशनी में अपनी गली की चहल-पहल देखूँ।"
आपने कहानी में बच्चे के घर के साथ वाली गली के बारे में बहुत-सी बातें पढ़ी हैं। उन बातों और अपनी कल्पना के आधार पर उस गली का एक चित्र बनाइए।
उत्तरः बच्चे की गली का दृश्यात्मक विवरणः
- . एक संकरी, लेकिन साफ़-सुथरी गली
- एक ओर चंदभाई ड्राईक्लीनर की दुकान
- दूसरी ओर तेजराम की चाय की दुकान, जहाँ ग्राहक बैठे बातें कर रहे हैं
- महेश घी सेंटर से घी और मलाई की खुशबू आ रही है
- गली में खेलते हुए बच्चे, कहीं कंचे तो कहीं पिट्टू खेल रहे हैं
- ऊपर टेलीफोन के तारों पर चिड़ियाँ चहचहा रही हैं
- एक कोने में फलवाला ठेला, जिसमें अमरूद, आम, केले
- कुछ बच्चे आम चूसते हुए भाग रहे हैं
- गली में से साइकिल, रिक्शा, और पैदल चलने वाले लोग जा रहे हैं
- एक खिड़की से बच्चा चुपके से झाँक रहा है - कहानी का दृश्य
पाठ से आग
आपकी बात
(क) बच्चे ने अस्पताल के वातावरण का विस्तार से सुंदर वर्णन किया है। इसी प्रकार आप अपनी कक्षा का वर्णन कीजिए।
उत्तरः मेरी कक्षा बहुत साफ-सुथरी और सुंदर है। वहाँ चारों ओर रंग-बिरंगे चार्ट लगे हैं, जिनसे हमें नई बातें सीखने को मिलती हैं। कक्षा में बड़ी-बड़ी खिड़कियाँ हैं, जहाँ से ताज़ी हवा और रोशनी आती है। हमारी कक्षा के बच्चे बहुत मिलनसार हैं और शिक्षक हमें बहुत ध्यान से पढ़ाते हैं।
(ख) कहानी में बच्चे को घर में अकेले दिन भर लेटे रहना पड़ा था। क्या आप कभी कहीं अकेले रहे हैं? उस समय आपको कैसा लग रहा था? आपने क्या-क्या किया था?
उत्तर: हाँ, एक बार मैं घर पर अकेला रह गया था जब मम्मी-पापा किसी रिश्तेदार के यहाँ गए थे। उस समय मुझे थोड़ा डर भी लगा और थोड़ी उत्सुकता भी हुई। मैं खिड़की से बाहर झाँककर आते-जाते लोगों को देखता रहा और टीवी पर अपने पसंदीदा कार्यक्रम देखे।
(ग) कहानी में आम खाने वाले मुन्नू को देखकर बच्चे को ईर्ष्या हुई थी। क्या आपको कभी किसी से या किसी को आपसे ईर्ष्या हुई है? आपने तब क्या किया था ताकि यह भावना दूर हो जाए?
उत्तरः हाँ, मुझे एक बार तब ईर्ष्या हुई थी जब मेरे दोस्त को पुरस्कार मिला और मुझे नहीं मिला। लेकिन बाद में मैंने सोचा कि उसने मेहनत की थी इसलिए पुरस्कार मिला। मैंने उससे प्रेरणा ली और अगली बार मैं खुद मेहनत करने लगा। इससे मेरी ईर्ष्या की भावना भी दूर हो गई।
(घ) कहानी में नानाजी-नानीजी बच्चे का पूरा ध्यान रखने का प्रयास करते हैं। आपके घर और विद्यालय में आपका ध्यान कौन-कौन रखते हैं? कैसे ?
उत्तरः मेरे घर में माँ-पापा और दादी मेरा ध्यान रखते हैं। वे समय पर मुझे खाना देते हैं, पढ़ाई में मदद करते हैं और मेरी तबीयत का भी ध्यान रखते हैं। विद्यालय में मेरी कक्षा अध्यापिका और मेरे दोस्त मेरा ध्यान रखते हैं।
(ङ) आप अपने परिजनों और मित्रों का ध्यान कैसे रखते हैं? क्या-क्या करते हैं या क्या-क्या नहीं करते हैं ताकि उन्हें कम-से-कम परेशानी हो?
उत्तरः मैं अपने परिजनों और मित्रों का ध्यान इस तरह रखता हूँ कि मैं उन्हें परेशान नहीं करता, समय पर काम करता हूँ, बीमार होने पर उनकी देखभाल करता हूँ और उनका साथ देता हूँ। मैं उनकी बातें ध्यान से सुनता हूँ और जरूरत पड़ने पर मदद करता हूँ।
बहाने
(क) कहानी में बच्चे ने बीमारी का बहाना बनाया था ताकि उसे स्कूल न जाना पड़े। क्या आपने कभी किसी कारण से बहाना बनाया है? यदि हाँ, तो उसके बारे में बताइए। उस समय आपके मन में कौन-कौन से भाव आ-जा रहे थे? आप कैसा अनुभव कर रहे थे?
उत्तरः एक बार मैंने स्कूल में होमवर्क न करने के कारण यह बहाना बनाया था कि मेरी तबीयत ठीक नहीं थी। उस समय मुझे डर भी लग रहा था कि पकड़ा न जाऊँ और थोड़ा पछतावा भी हो रहा था कि मुझे सच कहना चाहिए था।
(ख) आमतौर पर बनाए जाने वाले बहानों की एक सूची बनाइए।
उत्तरः आमतौर पर बनाए जाने वाले बहानेः
तबीयत ठीक नहीं है।
पेन खो गया था।
स्कूल बैग भूल गया।
मम्मी ने काम में लगा लिया था।
बिजली चली गई थी।
(ग) बहाने क्यों बनते पड़ते हैं? बहाने न बनाने पड़ें, इसके लिए हम क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तरः बहाने इसलिए बनाए जाते हैं क्योंकि हम अपने काम समय पर नहीं करते या सच बोलने से डरते हैं।
बहाने न बनाने के लिए:
समय का सही उपयोग करें।
ईमानदारी से काम करें।
अपने कार्य की जिम्मेदारी लें।
अनुमान
"मैं रज़ाई में पड़ा-पड़ा घर में चल रही गतिविधियों का अनुमान लगाता रहा।"
कहानी में बच्चे ने अनेक प्रकार के अनुमान लगाए हैं। क्या आपने कभी किसी अनदेखे व्यक्ति/वस्तु/पशु-पक्षी/स्थान आदि के विषय में अनुमान लगाए हैं? किसके बारे में? कब? विस्तार से बताइए।
(संकेत-जैसे पेड़ से आने वाली आवाज़ सुनकर किसी प्राणी का अनुमान लगाना; कहीं दूर रहने वाले किसी संबंधी/रिश्तेदार के विषय में सुनकर उसके संबंध में अनुमान लगाना।)
उत्तर: हाँ, एक बार मैं बगीचे में था और मैंने झाड़ियों से खड़खड़ाहट की आवाज़ सुनी। मैंने सोचा कि शायद वहाँ कोई बिल्ली या कुत्ता होगा। लेकिन जब पास गया तो देखा वहाँ एक गिलहरी थी। इसी तरह, जब मेरी मम्मी ने बताया कि कोई नया मेहमान आने वाला है, तो मैंने सोचा कि शायद मेरा मामा आ रहे होंगे।
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