CBSE Class 7 Hindi Chapter 3 – “फूल और काँटा” सारांश
मल्हार के पाठ 3 “फूल और काँटा” में कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ ने फूल और काँटे के माध्यम से मनुष्य के स्वभाव, गुणों और व्यवहार का सुंदर चित्रण किया है। यह कविता हमें जीवन में अच्छे गुण अपनाने और दूसरों के प्रति प्रेम तथा दया का भाव रखने की प्रेरणा देती है।
कवि कहते हैं कि फूल और काँटा दोनों एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं। दोनों को समान रूप से हवा, पानी, धूप और चाँदनी मिलती है। प्रकृति किसी के साथ भेदभाव नहीं करती, फिर भी दोनों का स्वभाव अलग-अलग होता है। काँटा अपने कठोर स्वभाव के कारण लोगों को चोट पहुँचाता है। वह उँगलियों में चुभ जाता है, कपड़े फाड़ देता है और दूसरों को कष्ट देता है। तितलियों और भँवरों को भी परेशान करता है।
इसके विपरीत फूल कोमलता, सुंदरता और प्रेम का प्रतीक है। वह अपनी मधुर सुगंध और आकर्षक रंगों से वातावरण को खुशहाल बना देता है। फूल तितलियों को अपनी ओर आकर्षित करता है और भँवरों को रस प्रदान करता है। उसकी खुशबू और सुंदरता से हर किसी का मन प्रसन्न हो जाता है। लोग फूल को सम्मानपूर्वक अपने सिर पर सजाते हैं, जबकि काँटे से दूर रहना पसंद करते हैं।
कवि आगे बताते हैं कि केवल बड़े परिवार या उच्च कुल में जन्म लेने से कोई महान नहीं बन जाता। यदि किसी व्यक्ति में अच्छे गुण, विनम्रता और परोपकार नहीं हैं, तो उसके कुल का बड़प्पन भी किसी काम का नहीं होता। मनुष्य की सच्ची पहचान उसके व्यवहार और कर्मों से होती है।
इस कविता के माध्यम से कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि हमें फूल की तरह दूसरों के जीवन में खुशियाँ, प्रेम और आनंद फैलाना चाहिए। हमें अपने व्यवहार से समाज में सम्मान प्राप्त करना चाहिए, न कि केवल अपने जन्म या परिवार के कारण।
केंद्रीय भाव
इस कविता का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य का सम्मान उसके अच्छे कर्मों, व्यवहार और गुणों से होता है। हमें फूल की तरह दूसरों को सुख देने वाला बनना चाहिए, न कि काँटे की तरह कष्ट पहुँचाने वाला।
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